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अजनाला कुएं से 100 और शहीदों की अस्थियां मिलीं
ब्यूरो/अमर उजाला, अजनाला (अमृतसर)
Updated Sun, 02 Mar 2014 10:28 AM IST
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अमृतसर की तहसील अजनाला में कुएं में दफन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के 282 शहीदों की अस्थियों निकालने के लिए शुरू की गई खुदाई के दूसरे दिन शनिवार शात तक करीब 100 शहीदों की अस्थियां निकाल ली गईं।
कुएं की खुदाई का काम इस कुएं के बारे में शोध करने वालों इतिहासकारों और गुरुद्वारा शहीदगंज-शहीदांवाला खूह कमेटी द्वारा सुयंक्त रूप से कराया जा रहा है।
शनिवार को निकाली गई अस्थियों के बारे में जानकारी देते हुए शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ और गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष अमरजीत सिंह सरकारिया ने बताया कि शनिवार शाम पांच बजे खुदाई का काम रोकने तक करीब 100 शहीद सैनिकों की अस्थियां निकाली जा चुकी हैं।
खुदाई में 50 खोपड़ियां, 40 से ज्यादा साबुत जबड़े, 500 से ज्यादा दांत, कुछ ब्रिटिश गोलियां, ईस्ट इंडिया कंपनी के एक-एक रुपये के 47 सिक्के, सोने के चार मोती, सोने के तीन तावीज, दो अंगुठियां और अन्य सामान मिला है।
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उन्होंने बताया कि अस्थियों के अलावा मिली वस्तुओं को कुएं के स्थान पर बनाए जाने वाले म्यूजियम में रखने के लिए सुरक्षित कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि कुएं में सैनिकों की अस्थियां बहुत ज्यादा संख्या में हैं, इसलिए अस्थियां निकालने का काम रविवार को भी जारी रहेगा।
कुएं में जिंदा फेंके सैनिकों ने मौत तक किया था संघर्ष
कमेटी के इतिहासकार सदस्यों ने बताया कि कुएं से बरामद कंकालों से कई नए ऐतिहासिक तथ्य उजागर हुए हैं। उन्होंने बताया कि कुएं में एक साथ सटे सात शहीदों के कंकाल देखकर पता चलता है कि जब अंग्रेजों ने कुएं में 237 शवों के 45 जिंदा सैनिकों को फेंका होगा तो उन्होंने खुद को बचाने के लिए काफी संघर्ष किया होगा।
सदस्यों ने बताया कि कंकालों से साफ जाहिर हो रहा है कि कुएं में जीवित सैनिकों ने एक-दूसरे के कंधे पर चढ़कर कुएं से बाहर निकलने का रास्ता बनाने की कोशिश की थी लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
नेता न अफसर, कोई नहीं आया श्रद्धांजलि देने
शहीदांवाला खूह कमेटी के महासचिव काबल सिंह शाहपुर ने कहा कि यह शहीदी कुआं जिसे कुछ कथित संत विलुप्त हो चुका बता रहे थे, आज स्थानीय लोगों केप्रयास से दुनिया के सामने इतिहास का गवाह बनकर आया है।
उन्होंने अफसोस जताया कि कुएं से शहीदों की अस्थियां निकालने के लिए आयोजित किए गए कार्यक्रम में न कोई सत्ताधारी नेता पहुंचा और न ही कोई प्रशासनिक अफसर ही आया।
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कुएं की खुदाई का काम इस कुएं के बारे में शोध करने वालों इतिहासकारों और गुरुद्वारा शहीदगंज-शहीदांवाला खूह कमेटी द्वारा सुयंक्त रूप से कराया जा रहा है।
शनिवार को निकाली गई अस्थियों के बारे में जानकारी देते हुए शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ और गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष अमरजीत सिंह सरकारिया ने बताया कि शनिवार शाम पांच बजे खुदाई का काम रोकने तक करीब 100 शहीद सैनिकों की अस्थियां निकाली जा चुकी हैं।
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खुदाई में 50 खोपड़ियां, 40 से ज्यादा साबुत जबड़े, 500 से ज्यादा दांत, कुछ ब्रिटिश गोलियां, ईस्ट इंडिया कंपनी के एक-एक रुपये के 47 सिक्के, सोने के चार मोती, सोने के तीन तावीज, दो अंगुठियां और अन्य सामान मिला है।
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उन्होंने बताया कि अस्थियों के अलावा मिली वस्तुओं को कुएं के स्थान पर बनाए जाने वाले म्यूजियम में रखने के लिए सुरक्षित कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि कुएं में सैनिकों की अस्थियां बहुत ज्यादा संख्या में हैं, इसलिए अस्थियां निकालने का काम रविवार को भी जारी रहेगा।
कुएं में जिंदा फेंके सैनिकों ने मौत तक किया था संघर्ष
कमेटी के इतिहासकार सदस्यों ने बताया कि कुएं से बरामद कंकालों से कई नए ऐतिहासिक तथ्य उजागर हुए हैं। उन्होंने बताया कि कुएं में एक साथ सटे सात शहीदों के कंकाल देखकर पता चलता है कि जब अंग्रेजों ने कुएं में 237 शवों के 45 जिंदा सैनिकों को फेंका होगा तो उन्होंने खुद को बचाने के लिए काफी संघर्ष किया होगा।
सदस्यों ने बताया कि कंकालों से साफ जाहिर हो रहा है कि कुएं में जीवित सैनिकों ने एक-दूसरे के कंधे पर चढ़कर कुएं से बाहर निकलने का रास्ता बनाने की कोशिश की थी लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
नेता न अफसर, कोई नहीं आया श्रद्धांजलि देने
शहीदांवाला खूह कमेटी के महासचिव काबल सिंह शाहपुर ने कहा कि यह शहीदी कुआं जिसे कुछ कथित संत विलुप्त हो चुका बता रहे थे, आज स्थानीय लोगों केप्रयास से दुनिया के सामने इतिहास का गवाह बनकर आया है।
उन्होंने अफसोस जताया कि कुएं से शहीदों की अस्थियां निकालने के लिए आयोजित किए गए कार्यक्रम में न कोई सत्ताधारी नेता पहुंचा और न ही कोई प्रशासनिक अफसर ही आया।