Lumpy Skin Disease: पठानकोट में 182 पशु संक्रमित, 42 टीमें तैनात, टीकाकरण भी शुरू
पठानकोट में पशु पालकों को जागरूक करने के लिए डिस्पेंसरी स्तर पर टीमों का गठन किया गया है। जिन गांवों में पशु डिस्पेंसरी है, वहां एक टीम गठित की गई है, जो आसपास के गांवों में जाकर जागरूकता फैला रही हैं।
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लंपी त्वचा रोग की चपेट में पठानकोट में भी पशु आने लगे हैं। पठानकोट में 182 पशु संक्रमित मिले हैं। हालांकि, पशु पालन विभाग की चौकसी से पठानकोट में हालात नियंत्रण में हैं। पठानकोट में इस रोग से अब तक किसी पशु की जान नहीं गई है। इसका बड़ा कारण यह है कि संक्रमण फैलने से पहले ही पठानकोट के अधिकारियों ने 42 से अधिक टीमों को गांवों में तैनात किया और जागरूकता फैलानी शुरू कर दी।
अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में हैं। अब तक संक्रमित पशुओं में अधिकतर ठीक हो चुके हैं। बाकियों का इलाज चल रहा है। पठानकोट में गोट पॉक्स की 1666 डोज लगाई जा चुकी हैं और पठानकोट के अधिकारियों ने इस रोग से पशुओं को बचाने के लिए 4100 डोज की मांग सरकार को भेजी है। जो बुधवार तक पठानकोट पहुंचेगी और टीमें गांव-गांव जाकर यह वैक्सीन पशुओं को लगाएंगे।
गांव-गांव जाकर पशु पालकों को जागरूक कर रहे
पठानकोट में पशु पालकों को जागरूक करने के लिए डिस्पेंसरी स्तर पर टीमों का गठन किया गया है। जिन गांवों में पशु डिस्पेंसरी है, वहां एक टीम गठित की गई है, जो आसपास के गांवों में जाकर जागरूकता फैला रही हैं। जिसमें पशु पालन विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी संबंधी पशु पालकों को जागरूक किया जा रहा है। जागरूकता अभियान में कर्मचारी और डिप्टी डायरेक्टर स्तर के अधिकारी भी डटे हैं।
पशुओं की खरीद-फरोख्त और आवाजाही पर रोक
पशु पालन विभाग पठानकोट के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रमेश कोहली का कहना है कि बीमारी के खत्म होने तक पशुओं की खरीद-फरोख्त और आवाजाही पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा, लोगों को मक्खी-मच्छरों से दूर रखने और साफ रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पशु पालकों को लंपी रोग के लक्षणों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पशु को तेज बुखार, चमड़ी पर चकत्ते, टांगों पर सूजन इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा इस बीमारी की चपेट में आया पशु चारा खाना बंद कर देता है।
डीसी पठानकोट हरबीर सिंह ने बताया कि जिला पठानकोट में स्थिति नियंत्रण में है। अब तक कुल 182 पशु इस रोग से ग्रस्त थे। उन्होंने पशुपालकों से कहा कि जहां पर पशुओं को बांधा जाता है, वहां पर एक फीसदी फार्मलीन या सोडियम हाई पिक्रोलाइट का स्प्रे करें। किसी भी पशु में लक्षण नजर आने पर उसे अन्य पशुओं से अलग करें और तुरंत नजदीकी पशु संस्था से संपर्क करें।