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चंडीगढ़ से दिल्ली तक सेमी हाई स्पीड ट्रेन में 16 बाधाएं
दीपक शाही/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 21 Jan 2016 03:05 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बीच हुए समझौते को मूर्त रूप देने के लिए फ्रांस की राष्ट्रीय रेलवे (एनएनसीएफ) की टीम चंडीगढ़ से अंबाला तक रेल ट्रैक का सर्वे करने के लिए पहुंच चुकी है।
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लेकिन तकनीकी माहिरों का मानें तो चंडीगढ़ से अंबाला तक इस रूट पर हाई स्पीड या सेमी हाई स्पीड ट्रेन चलाना संभव नहीं है क्योंकि .5 डिग्री कर्व तक के ट्रैक पर ही ट्रेनें 200 किमी की रफ्तार से दौड़ सकती हैं जबकि चंडीगढ़ से अंबाला तक का रेल ट्रैक 3 डिग्री कर्व पर बना हुआ है। इसके अलावा इनके बीच 16 घुमावदार मोड़ हैं।
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अंबाला से चंडीगढ़ तक रेलवे ट्रैक .5 से 3 डिग्री कर्व पर बना हुआ है। अगर इन घुमावदार मोड़ों पर रेलवे लाइन का कर्व ज्यादा कम किया गया तो लाइन के आसपास लोगों के बने घर भी तोड़ने पड़ सकते हैं।
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वहीं, कई जगह बड़ी इमारतें भी बनी हैं। रेलवे सूत्रों के मुताबिक जहां रेलवे लाइन के आसपास घनी आबादी वाले जगह पर मोड़ हैं, वहां पर रेलवे के पास अपनी जमीन भी नहीं है। इस स्थिति में तीन डिग्री से कुछ कम कर्व पर ही विभाग को काम चलाना पड़ेगा।
चंडीगढ़ से दिल्ली तक हाई स्पीड ट्रैक बनने के बाद भी ज्यादा से ज्यादा 150 किमी प्रतिघंटे के औसत रफ्तार से सेमी हाई स्पीड ट्रेन ही चल सकती है। इसके लिए भी रेलवे को नए सिरे से तैयारी करनी पड़ेगी। इस प्रोजेक्ट पर भारतीय रेलवे के साथ फ्रांस की राष्ट्रीय रेलवे (एसएनसीएफ) की टीम सर्वे करने में जूटी है।
एक बार इस प्रोजेक्ट पर सर्वे हो चुका है। दूसरी बार एसएनसीएफ की टीम भारतीय रेलवे के साथ सर्वे कर रही है। अभी नई दिल्ली और चंडीगढ़ के बीच शताब्दी एक्सप्रेस सबसे तेज गति की ट्रेन है। इसकी गति औसतन 79.80 किमी प्रति घंटा है।
अभी दिल्ली दूर है
चंडीगढ़ से अंबाला तक 16 घुमावदार मोड़ हैं। रेलवे के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक रेलवे लाइन का कर्व .5 डिग्री होने पर ही 200 किमी प्रतिघंटा के रफ्तार से इस रूट पर ट्रेन चल सकती है। जबकि रेलवे सूत्रों के मुताबिक यह मुश्किल है। क्योंकि जहां तीन डिग्री कर्व पर रेलवे लाइन मुड़ा है। वहां करीब 2.8 से 2.5 डिग्री तक ही संभावना बन रही है। इससे ज्यादा कर्व घटाने पर लोगों के घर तोड़ने पड़ सकते हैं।
सेमी हाई स्पीड ट्रैक में बाधा
- अभी रेलवे ट्रैक 52 केजी प्रति मीटर, कम से कम 60 केजी प्रति मीटर होना चाहिए।
- चंडीगढ़ से अंबाला तक रेलवे लाइन पर आने वाले 16 मोड़ हैं। जो हाई स्पीड ट्रेन के लिए सबसे बड़ी बाधा हैं।
- रेलवे फाटक का होना
- रेलवे लाइन खुला होना
- रेलवे लाइन का कर्व तीन जगह 3 डिग्री है।
- रेलवे लाइन के अधिकतर स्लीपर टूटे हैं।
सेमी हाई स्पीड चलाने के लिए चुनौतियां
-रेलवे ट्रैक को बदलना पड़ेगा
-सभी रेलवे फाटक हटाकर अंडर पास और अंडर ब्रिज बनाने होंगे।
- रेलवे लाइन के दोनों तरफ फेंसिंग लगाना होगा। ताकि रेलवे लाइन पर आवारा पशु न आएं
- रेलवे लाइन का कर्व कम करना पड़ेगा।
- रेलवे लाइन के सभी स्लीपर हैवी वजन के लगाने होंगे।
अशोक कुमार, सीनियर, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर प्रथम रेलवे अंबाला डिवीजन ने बताया कि चंडीगढ़ से अंबाला रेलवे लाइन .5 से 3 डिग्री कर्व पर बना है। इस रास्ते पर 16 मोड़ हैं। जिसमें तीन मोड़ तीन डिग्री कर्व पर हैं। .5 डिग्री कर्व पर ही ट्रेनें 200 किमी प्रतिघंटा के रफ्तार से चल सकती हैं।