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इंजीनियर भर्ती मामले में आरोपी एचपीएस के पूर्व चेयरमैन सहित छह बरी
Updated Thu, 08 Mar 2018 01:28 AM IST
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इंजीनियर भर्ती मामले में आरोपी एचपीएस के पूर्व चेयरमैन सहित छह बरी
- आयु सीमा में राहत देने के लगे थे आरोप, पेश नहीं किए जा सके पुख्ता सुबूत
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
इंजीनियर की भर्ती मामले में उम्र में राहत देने सहित अन्य मामलों में छह आरोपियों को सुबूतों के अभाव में पंचकूला की एक अदालत ने बरी कर दिया है। इस मामले में हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण चंद्र बांगड़, दो पूर्व सदस्यों के अलावा तीन उम्मीदवार भी शामिल हैं।
2004 में एचपीएससी की ओर से इंजीनियरों की भर्ती मामले में तीन उम्मीदवारों को उम्र सीमा में राहत देने का आरोप लगे थे। इसमें पूर्व चेयरमैन केसी बांगड़ सहित पांच अन्य को भी आरोपी बनाया गया था। अभियोजन पक्ष इस मामले को साबित करने में विफल रहा, जिससे छह आरोपियों को बरी कर दिया गया। बचाव पक्ष के वकील एसपीएस परमार के अनुसार अभियोजन पक्ष पूर्व चेयरमैन सहित अन्य के खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं किया जा सका, नतीजतन सभी को आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
हरियाणा राज्य सतर्कता ब्यूरो के मुताबिक बांगड़ सहित आयोग के अन्य सदस्य महेंद्र सिंह, अवतार सिंह ने भी आयु सीमा में इंजीनियरों का पक्ष लिया था। इसके बाद सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था।
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एचपीएससी की ओर से दो अक्टूबर 2004 को एक संशोधन जारी करने का आरोप था, जिसके तहत सरकारी बोर्ड और निगमों के कर्मचारियों को योग्यता के लिए निर्धारित आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट दी गई थी। हालांकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, बावजूद इसके नियमों की अनदेखी की गई। इस मामले में जारी निर्देश के बाद कृष्ण कुमार, फूल कुमार, शीशपाल को पर्यावरण अभियंताओं के रूप में चयनित कर लिया गया, जिन्हें आरोपी बनाया गया। पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान मामले की जांच के लिए राज्य चौकसी ब्यूरो को पत्र भेजा गया था। जांच के लिए ब्यूरो ने 2010 में आरोप पत्र भी दायर किया, लेकिन बाद में मामला उच्च न्यायालय में लंबित रहा। आरोपियों पर 2016 में आरोप भी तय किए गए, लेकिन सुबूतों को पेश नहीं करने की वजह से सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया गया।
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इंजीनियर भर्ती मामले में आरोपी एचपीएस के पूर्व चेयरमैन सहित छह बरी
- आयु सीमा में राहत देने के लगे थे आरोप, पेश नहीं किए जा सके पुख्ता सुबूत
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
इंजीनियर की भर्ती मामले में उम्र में राहत देने सहित अन्य मामलों में छह आरोपियों को सुबूतों के अभाव में पंचकूला की एक अदालत ने बरी कर दिया है। इस मामले में हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण चंद्र बांगड़, दो पूर्व सदस्यों के अलावा तीन उम्मीदवार भी शामिल हैं।
2004 में एचपीएससी की ओर से इंजीनियरों की भर्ती मामले में तीन उम्मीदवारों को उम्र सीमा में राहत देने का आरोप लगे थे। इसमें पूर्व चेयरमैन केसी बांगड़ सहित पांच अन्य को भी आरोपी बनाया गया था। अभियोजन पक्ष इस मामले को साबित करने में विफल रहा, जिससे छह आरोपियों को बरी कर दिया गया। बचाव पक्ष के वकील एसपीएस परमार के अनुसार अभियोजन पक्ष पूर्व चेयरमैन सहित अन्य के खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं किया जा सका, नतीजतन सभी को आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
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हरियाणा राज्य सतर्कता ब्यूरो के मुताबिक बांगड़ सहित आयोग के अन्य सदस्य महेंद्र सिंह, अवतार सिंह ने भी आयु सीमा में इंजीनियरों का पक्ष लिया था। इसके बाद सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था।
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एचपीएससी की ओर से दो अक्टूबर 2004 को एक संशोधन जारी करने का आरोप था, जिसके तहत सरकारी बोर्ड और निगमों के कर्मचारियों को योग्यता के लिए निर्धारित आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट दी गई थी। हालांकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, बावजूद इसके नियमों की अनदेखी की गई। इस मामले में जारी निर्देश के बाद कृष्ण कुमार, फूल कुमार, शीशपाल को पर्यावरण अभियंताओं के रूप में चयनित कर लिया गया, जिन्हें आरोपी बनाया गया। पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान मामले की जांच के लिए राज्य चौकसी ब्यूरो को पत्र भेजा गया था। जांच के लिए ब्यूरो ने 2010 में आरोप पत्र भी दायर किया, लेकिन बाद में मामला उच्च न्यायालय में लंबित रहा। आरोपियों पर 2016 में आरोप भी तय किए गए, लेकिन सुबूतों को पेश नहीं करने की वजह से सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया गया।