{"_id":"5a70cf8e4f1c1ba1268b763c","slug":"151734281112600-pkl-office-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपनी मांगों के समर्थन में 600 कर्मियों ने दी सामूहिक गिरफ्तारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपनी मांगों के समर्थन में 600 कर्मियों ने दी सामूहिक गिरफ्तारी
Updated Wed, 31 Jan 2018 01:41 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपनी मांगों के समर्थन में 600 कर्मियों ने दी सामूहिक गिरफ्तारी
- पंचकूला की सड़कों पर सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
- पुलिस ने कर्मचारियों को गिरफ्तार कर पांच बसों में ले जाकर छोड़ दिया
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
ट्रेड यूनियन और कर्मचारी संगठनों के करीब 600 कर्मचारियों, आशा वर्कर, मिड-डे मील वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को सामूहिक गिरफ्तारी दी। उपायुक्त कार्यालय के बाहर इकट्ठा हुए कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार विरोधी नारे लगाते हुए सत्याग्रह का हिस्सा बने। यूनियन के सैकड़ों सदस्यों की एक साथ मौजूदगी को देखते हुए हालात से निपटने के लिए पुलिस की भी तैनाती पहले से की गई थी। बाद में कर्मियों को गिरफ्तार कर उन्हें पांच बसों में ले जाकर छोड़ दिया गया।
ट्रेड यूनियनों के जिला प्रवक्ता श्रवण जांगड़ा ने बताया कि वर्तमान सरकार ने सभी वर्गों के साथ वादाखिलाफी की है। किसान, युवा, महिला या कर्मचारी वर्ग सभी का सरकार से विश्वास उठ गया है। बार-बार किए वायदों के बाद भी सरकार की ओर से कर्मचारी हितों की अनदेखी की गईं। आशा वर्कर्स में मामूली बढ़ोतरी तो युवाओं को रोजगार न मिलने की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार के कर्मचारी विरोधी नीतियों को देखते हुए यूनियनों ने जेल भरो आंदोलन का फैसला लिया। अगर, फिर भी मांगें नहीं मानी गईं तो अगले माह प्रदेश भर के कर्मचारी हड़ताल के लिए भी मजबूर होंगे।
इस दौरान यवनिका से सैकड़ों कर्मी जुलूस की शक्ल में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पैदल ही उपायुक्त कार्यालय के बाहर पहुंचे। वहां भी सरकार के खिलाफ नारेबाजी तब तक नारेबाजी करते रहे जब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया।
विज्ञापन
गिरफ्तारी के वक्त महिलाओं के साथ पहुंची बच्चियां भी
प्रदर्शन करने वालों में लाल रंग के ड्रेस में सैकड़ों महिलाएं थीं जबकि उनके साथ एक-दो बच्चे भी थे, जिन्हें गिरफ्तारियां देते वक्त मुश्किलें पेश आईं। एक महिला कर्मी ने कहा कि इस बच्ची को कहां ले जाऊं। गिरफ्तारी के बाद जब बसों में उन्हें ले जाया जा रहा था, उस दौरान भी लगातार नारेबाजी का सिलसिला जारी रहा। कुछ प्रदर्शनकारियों को यह चिंता सता रही थी कि अगर गिरफ्तारियां नहीं होती तो अब किसके साथ आगे बढ़ेंगी।
विज्ञापन
- पंचकूला की सड़कों पर सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
- पुलिस ने कर्मचारियों को गिरफ्तार कर पांच बसों में ले जाकर छोड़ दिया
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
ट्रेड यूनियन और कर्मचारी संगठनों के करीब 600 कर्मचारियों, आशा वर्कर, मिड-डे मील वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को सामूहिक गिरफ्तारी दी। उपायुक्त कार्यालय के बाहर इकट्ठा हुए कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार विरोधी नारे लगाते हुए सत्याग्रह का हिस्सा बने। यूनियन के सैकड़ों सदस्यों की एक साथ मौजूदगी को देखते हुए हालात से निपटने के लिए पुलिस की भी तैनाती पहले से की गई थी। बाद में कर्मियों को गिरफ्तार कर उन्हें पांच बसों में ले जाकर छोड़ दिया गया।
ट्रेड यूनियनों के जिला प्रवक्ता श्रवण जांगड़ा ने बताया कि वर्तमान सरकार ने सभी वर्गों के साथ वादाखिलाफी की है। किसान, युवा, महिला या कर्मचारी वर्ग सभी का सरकार से विश्वास उठ गया है। बार-बार किए वायदों के बाद भी सरकार की ओर से कर्मचारी हितों की अनदेखी की गईं। आशा वर्कर्स में मामूली बढ़ोतरी तो युवाओं को रोजगार न मिलने की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार के कर्मचारी विरोधी नीतियों को देखते हुए यूनियनों ने जेल भरो आंदोलन का फैसला लिया। अगर, फिर भी मांगें नहीं मानी गईं तो अगले माह प्रदेश भर के कर्मचारी हड़ताल के लिए भी मजबूर होंगे।
विज्ञापन
इस दौरान यवनिका से सैकड़ों कर्मी जुलूस की शक्ल में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पैदल ही उपायुक्त कार्यालय के बाहर पहुंचे। वहां भी सरकार के खिलाफ नारेबाजी तब तक नारेबाजी करते रहे जब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया।
विज्ञापन
गिरफ्तारी के वक्त महिलाओं के साथ पहुंची बच्चियां भी
प्रदर्शन करने वालों में लाल रंग के ड्रेस में सैकड़ों महिलाएं थीं जबकि उनके साथ एक-दो बच्चे भी थे, जिन्हें गिरफ्तारियां देते वक्त मुश्किलें पेश आईं। एक महिला कर्मी ने कहा कि इस बच्ची को कहां ले जाऊं। गिरफ्तारी के बाद जब बसों में उन्हें ले जाया जा रहा था, उस दौरान भी लगातार नारेबाजी का सिलसिला जारी रहा। कुछ प्रदर्शनकारियों को यह चिंता सता रही थी कि अगर गिरफ्तारियां नहीं होती तो अब किसके साथ आगे बढ़ेंगी।