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ये मामला सिर्फ राज्य सरकार के ही नहीं बल्की गृह मंत्री राजनाथ सिंह के संज्ञान में भी है
Updated Tue, 12 Sep 2017 01:06 AM IST
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जो भगाएगा मक्खी उसकी विधायकी पक्की, जुमला था, जुमला ही रह गया
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
2014 के विधानसभा चुनाव का जुमला जो भगाएगा मक्खी उसकी विधायकी पक्की, ये सिर्फ जुमला ही रह गया। लोगों में नेताओं के खिलाफ इतना रोष है कि वह अगले चुनाव में सब सिखाने के लिए तैयार हैं। लेकिन इस बार वह किसी जुमले में नहीं फंसने वाले हैं। ऐसा बरवाला और रायपुररानी लोगों का कहना है। इन इलाकों पोल्ट्री फार्मों में फैली गंदगी के कारण मक्खियों की समस्या जस की तस बनी है। लोग इन पोल्ट्री फार्मों को यहां से पूरी तरह खाली कराना चाहते हैं। यह मामला सिर्फ राज्य सरकार के ही नहीं बल्कि 2014 के बाद से केंद्र के संज्ञान में भी है। तीन साल बीत गए, लेकिन इस क्षेत्र के लोगों को मक्खियों की समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। इस समस्या के चलते ग्रामीण दूषित वातावरण में अपनी जिंदगी व्यतीत करने को मजबूर हैं। मक्खियों की भरमार से प्रभावित लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में भी आ रहे हैं। जिसके चलते उन्हें आमदनी का बड़ा हिस्सा दवाओं पर खर्च करना पड़ता है।
विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी रैली में राजनाथ सिंह, भाजपा उम्मीदवार ज्ञानचंद गुप्ता और लतिका शर्मा के लिए चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे। तब से उन्हें बरवाला और रायपुररानी में मक्खियों की समस्या के बारे में पता है। चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा था कि भाजपा सिर्फ बोलती नहीं करके दिखाती है। बरवाला और रायपुरानी के मक्खियों के संबंध में वह अक्सर यहां के स्थानीय विधायक लतिका शर्मा से पूछते हैं। लेकिन उनके पास इसका जवाब नहीं होता। इसकी पुष्टि खुद कालका विधायक लतिका शर्मा ने की है।
बरवाला में मक्खियों के चलते बेटी ब्याहने को लोग तैयार नहीं
बरवाला में मक्खियों की समस्या के चलते दूसरे जिलों के लोग बेटी ब्याहने को भी तैयार नहीं होते। क्योंकि जैसे ही लोग गांव में लड़का देखने आते हैं, उनके स्वागत में सर्व चाय और पानी में मक्खियां गीर जाती हैं। ये तो मेहमानों का हाल है। गर्मी के दिनों में तो मक्खियों के चलते लोग खाना भी नहीं खा पाते। बदबू इतनी होती है कि यहां रुकना भी मुश्किल होता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि निवासियों का क्या हाल होगा।
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हिदायतों का क्या हुआ
जानकारी के अनुसार मक्खियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिये कुछ महीने पहले प्रशासन ने पोल्ट्री फार्म मालिकों व अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को हैदराबाद भेजा था। उसके बाद फार्म मालिकों को कुछ हिदायतें भी जारी की गई थीं। कुछ पोल्ट्री फार्मों को बंद करने के नोटिस भी दिये गए थे। लेकिन उसका कोई असर नहीं दिख रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
2014 के विधानसभा चुनाव का जुमला जो भगाएगा मक्खी उसकी विधायकी पक्की, ये सिर्फ जुमला ही रह गया। लोगों में नेताओं के खिलाफ इतना रोष है कि वह अगले चुनाव में सब सिखाने के लिए तैयार हैं। लेकिन इस बार वह किसी जुमले में नहीं फंसने वाले हैं। ऐसा बरवाला और रायपुररानी लोगों का कहना है। इन इलाकों पोल्ट्री फार्मों में फैली गंदगी के कारण मक्खियों की समस्या जस की तस बनी है। लोग इन पोल्ट्री फार्मों को यहां से पूरी तरह खाली कराना चाहते हैं। यह मामला सिर्फ राज्य सरकार के ही नहीं बल्कि 2014 के बाद से केंद्र के संज्ञान में भी है। तीन साल बीत गए, लेकिन इस क्षेत्र के लोगों को मक्खियों की समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। इस समस्या के चलते ग्रामीण दूषित वातावरण में अपनी जिंदगी व्यतीत करने को मजबूर हैं। मक्खियों की भरमार से प्रभावित लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में भी आ रहे हैं। जिसके चलते उन्हें आमदनी का बड़ा हिस्सा दवाओं पर खर्च करना पड़ता है।
विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी रैली में राजनाथ सिंह, भाजपा उम्मीदवार ज्ञानचंद गुप्ता और लतिका शर्मा के लिए चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे। तब से उन्हें बरवाला और रायपुररानी में मक्खियों की समस्या के बारे में पता है। चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा था कि भाजपा सिर्फ बोलती नहीं करके दिखाती है। बरवाला और रायपुरानी के मक्खियों के संबंध में वह अक्सर यहां के स्थानीय विधायक लतिका शर्मा से पूछते हैं। लेकिन उनके पास इसका जवाब नहीं होता। इसकी पुष्टि खुद कालका विधायक लतिका शर्मा ने की है।
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बरवाला में मक्खियों के चलते बेटी ब्याहने को लोग तैयार नहीं
बरवाला में मक्खियों की समस्या के चलते दूसरे जिलों के लोग बेटी ब्याहने को भी तैयार नहीं होते। क्योंकि जैसे ही लोग गांव में लड़का देखने आते हैं, उनके स्वागत में सर्व चाय और पानी में मक्खियां गीर जाती हैं। ये तो मेहमानों का हाल है। गर्मी के दिनों में तो मक्खियों के चलते लोग खाना भी नहीं खा पाते। बदबू इतनी होती है कि यहां रुकना भी मुश्किल होता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि निवासियों का क्या हाल होगा।
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हिदायतों का क्या हुआ
जानकारी के अनुसार मक्खियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिये कुछ महीने पहले प्रशासन ने पोल्ट्री फार्म मालिकों व अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को हैदराबाद भेजा था। उसके बाद फार्म मालिकों को कुछ हिदायतें भी जारी की गई थीं। कुछ पोल्ट्री फार्मों को बंद करने के नोटिस भी दिये गए थे। लेकिन उसका कोई असर नहीं दिख रहा है।