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डिवोश्नल
Updated Mon, 24 Jul 2017 02:03 AM IST
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भगवान शिव के शृंगार में छिपे रहस्य बताए
कालका। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से अंबेडकर भवन में चल रही श्री शिव कथा के तीसरे दिन आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मनस्विनी भारती ने भगवान शिव के शृंगार में छिपे आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर किया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव के अद्भुत और विलक्षण शृंगार को साधारण बुद्धि से समझ पाना कठिन ही नहीं असंभव है। भोले नाथ के गले में लिपटे सर्प ये इशारा करते हैं कि कैलाशपति का दर्शन कर काल और माया को जीतने की कोशिश करें। तन पर लगी भस्म और नर कपोलों को धारण कर भगवान शिव जीवन की नश्वरता के बारे में जागरूक करते हैं कि समय के रहते-रहते मानव जीवन के परम ध्येय ईश्वर की प्राप्ति कर लो। भोले नाथ जटाओं को इकट्ठा कर सुंदर मुकुट के रूप में सुशोभित कर समझाते हैं कि अपने बिखरे हुए मन को ब्रह्म केंद्र पर एकत्रित करें।
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कालका। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से अंबेडकर भवन में चल रही श्री शिव कथा के तीसरे दिन आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मनस्विनी भारती ने भगवान शिव के शृंगार में छिपे आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर किया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव के अद्भुत और विलक्षण शृंगार को साधारण बुद्धि से समझ पाना कठिन ही नहीं असंभव है। भोले नाथ के गले में लिपटे सर्प ये इशारा करते हैं कि कैलाशपति का दर्शन कर काल और माया को जीतने की कोशिश करें। तन पर लगी भस्म और नर कपोलों को धारण कर भगवान शिव जीवन की नश्वरता के बारे में जागरूक करते हैं कि समय के रहते-रहते मानव जीवन के परम ध्येय ईश्वर की प्राप्ति कर लो। भोले नाथ जटाओं को इकट्ठा कर सुंदर मुकुट के रूप में सुशोभित कर समझाते हैं कि अपने बिखरे हुए मन को ब्रह्म केंद्र पर एकत्रित करें।