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15 साल पहले निर्मित पशु चिकित्सालय को शुरू होने का इंतजार
Updated Sat, 17 Jun 2017 01:36 AM IST
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यहां 15 साल से बंद है पशु अस्पताल
700 से अधिक पशुओं के लिए डखरोग में नहीं एक भी वेटरनरी डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
डखरोग गांव में 15 साल पहले बने पशु अस्पताल को अब भी वेटरनरी डॉक्टर का इंतजार है। अस्पताल में वेटरनरी डॉक्टर न बैठने के कारण न केवल पशुओं की सेहत को खतरा रहता है। बल्कि ग्रामीणों की जीविका भी प्रभावित हो रही है। डखरोग पंचायत में 700 से अधिक खच्चर, घोड़े, गाय, बैल, बकरी सहित अन्य पशु हैं। इनमें दुधारू पशुओं के अलावा ऐसे भी हैं, जिनका पहाड़ी इलाकों में सामान लाने ले जाने में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अस्पताल की सुविधा न होने से लोगों को दूसरे गांवों की ओर रुख करना पड़ता है। गांव में एक वेटरनरी डॉक्टर बुलाने के लिए 400-1000 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ एक पशु के मालिक पर पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 15 साल पहले गांव के आखिरी छोर पर पशु अस्पताल का निर्माण किया गया था। यहां इमारत तो बन गई, लेकिन वेटरनरी डॉक्टर नहीं रखा गया। यहीं नहीं अस्पताल अंदर खाली पड़ा है। सिर्फ कमरे ही हैं।
इस अस्पताल में खाली वक्त बिताने के लिए कभी कभार लोग बैठते हैं। या फिर पशुओं का चारा या दूसरे सामान के लिए इसे स्टोर की तरह उपयोग करते हैं।
पशु चिकित्सालय न होने से लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तो इलाके के लिए मल्लाह जाना पड़ता है या अधिक खर्च कर वेटरनरी डॉक्टरों से दवा लेनी पड़ती है।
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रतन सिंह, डखरोग।
दुधारू पशुओं की तबीयत खराब होने से न केवल उनकी सेहत, बल्कि परिवार दूध देने से पहले उसकी खराब होने की चिंता रहती है। यहीं नहीं दूध की आपूर्ति को लेकर भी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। इस लिए यहां पशु अस्पताल की सख्त जरूरत है।
बालक राम, डखरोग।
गांव में पशुओं के लिए अस्पताल तो बना दिया है, लेकिन यहां पशुओं का डॉक्टर नहीं रखा गया। हमारी मांग है कि जल्द से जल्द डॉक्टर सहित पशुओं के इलाज के लिए सुविधाएं मुहैया की जानी चाहिए।
दीवान चंद, डखरोग गांव।
हफ्ते में रोजाना नहीं तो कम से तीन-चार दिन तो डॉक्टर का होना बेहद जरूरी है। गवाही और डखरोग में पशुओं की संख्या 700 से अधिक है, लेकिन उनकी देखभाल के लिए डॉक्टर एक भी नहीं है।
मेहर और वीर सिंह, डखरोग।
थोड़ी बहुत खेती है। यहां दूध ही कमाई का जरिया है, लेकिन पशु की तबीयत अगर बिगड़ जाए तो पूरे परिवार पर इसका असर पड़ता है। जल्द से जल्द अस्पताल में पशुओं के डॉक्टर सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की पहल की जाए।
मदन सिंह, डखरोग।
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700 से अधिक पशुओं के लिए डखरोग में नहीं एक भी वेटरनरी डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
डखरोग गांव में 15 साल पहले बने पशु अस्पताल को अब भी वेटरनरी डॉक्टर का इंतजार है। अस्पताल में वेटरनरी डॉक्टर न बैठने के कारण न केवल पशुओं की सेहत को खतरा रहता है। बल्कि ग्रामीणों की जीविका भी प्रभावित हो रही है। डखरोग पंचायत में 700 से अधिक खच्चर, घोड़े, गाय, बैल, बकरी सहित अन्य पशु हैं। इनमें दुधारू पशुओं के अलावा ऐसे भी हैं, जिनका पहाड़ी इलाकों में सामान लाने ले जाने में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अस्पताल की सुविधा न होने से लोगों को दूसरे गांवों की ओर रुख करना पड़ता है। गांव में एक वेटरनरी डॉक्टर बुलाने के लिए 400-1000 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ एक पशु के मालिक पर पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 15 साल पहले गांव के आखिरी छोर पर पशु अस्पताल का निर्माण किया गया था। यहां इमारत तो बन गई, लेकिन वेटरनरी डॉक्टर नहीं रखा गया। यहीं नहीं अस्पताल अंदर खाली पड़ा है। सिर्फ कमरे ही हैं।
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इस अस्पताल में खाली वक्त बिताने के लिए कभी कभार लोग बैठते हैं। या फिर पशुओं का चारा या दूसरे सामान के लिए इसे स्टोर की तरह उपयोग करते हैं।
पशु चिकित्सालय न होने से लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तो इलाके के लिए मल्लाह जाना पड़ता है या अधिक खर्च कर वेटरनरी डॉक्टरों से दवा लेनी पड़ती है।
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रतन सिंह, डखरोग।
दुधारू पशुओं की तबीयत खराब होने से न केवल उनकी सेहत, बल्कि परिवार दूध देने से पहले उसकी खराब होने की चिंता रहती है। यहीं नहीं दूध की आपूर्ति को लेकर भी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। इस लिए यहां पशु अस्पताल की सख्त जरूरत है।
बालक राम, डखरोग।
गांव में पशुओं के लिए अस्पताल तो बना दिया है, लेकिन यहां पशुओं का डॉक्टर नहीं रखा गया। हमारी मांग है कि जल्द से जल्द डॉक्टर सहित पशुओं के इलाज के लिए सुविधाएं मुहैया की जानी चाहिए।
दीवान चंद, डखरोग गांव।
हफ्ते में रोजाना नहीं तो कम से तीन-चार दिन तो डॉक्टर का होना बेहद जरूरी है। गवाही और डखरोग में पशुओं की संख्या 700 से अधिक है, लेकिन उनकी देखभाल के लिए डॉक्टर एक भी नहीं है।
मेहर और वीर सिंह, डखरोग।
थोड़ी बहुत खेती है। यहां दूध ही कमाई का जरिया है, लेकिन पशु की तबीयत अगर बिगड़ जाए तो पूरे परिवार पर इसका असर पड़ता है। जल्द से जल्द अस्पताल में पशुओं के डॉक्टर सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की पहल की जाए।
मदन सिंह, डखरोग।