अटारी-वाघा सीमा: लॉकडाउन में फंसे 82 पाकिस्तानी अपने वतन लौटे, 114 भारतीयों की भी हुई घर वापसी
- बेटी-ससुराल और रिश्तेदारों के यहां रुके पाकिस्तानियों ने बताए अनुभव
- जगपाल दास बोले- राजस्थान में स्थित मंदिरों के दर्शन नहीं कर सके
- निकिता ने कहा- भारत के शहरों में घूमने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी
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लॉकडाउन में भारत-पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में फंसे नागरिक अपने-अपने वतन लौट गए हैं। पाकिस्तान से 114 भारतीय वतन लौटे हैं। वहीं भारत के कई शहरों में फंसे 82 पाकिस्तानी नागरिक अटारी सड़क सीमा से पाकिस्तान चले गए हैं। लगभग चार माह से फंसे दोनों देशों के नागरिकों में वतन लौटने की खुशी दिखी।
राजस्थान के जोधपुर में ब्याही दो बेटियों से मिलने पाकिस्तान के सिंध से आए जगपाल दास लॉकडाउन के दौरान बेटियों के पास ही रहने को मजबूर हो गए थे। चार माह बाद वतन लौट रहे जगपाल दास के साथ उनका एक नाती भी पहली बार पाकिस्तान जा रहा है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ बेटी के घर पर थे, इसलिए खाने-पीने व रहने की कोई दिक्कत नहीं हुई। इस दौरान तीन बार कोरोना का टेस्ट भी हुआ।
जोधपुर प्रशासन ने पूरा सहयोग दिया। लॉकडाउन में वह राजस्थान में स्थित मंदिरों के दर्शन नहीं कर सके। जब नाती को छोड़ने दोबारा हिंदुस्तान आएंगे तो मंदिरों के दर्शन की इच्छा पूरी करेंगे। लॉकडाउन में सरकार ने जो भी निर्देश दिए, उसका पालन किया। घर से बाहर नहीं निकले।
रिश्तेदार के घर रुकने का मानसिक दबाव रहा
कराची निवासी निकिता ने बताया की वह चार महीने पहले इंदौर में रहने वाले एक रिश्तेदार की शादी में आई थीं। शादी के साथ ही लॉकडाउन लागू हो गया। भारत के शहरों में घूमने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। वह अकेले ही इंदौर आई थीं। चार माह तक परिवार से दूर रहने की पीड़ा झेलनी पड़ी। बेशक रिश्तेदार के घर में थीं लेकिन कोई भी किसी रिश्तेदार के यहां कितने दिन रुक सकता है। इस बात का मानसिक दबाव भी रहा।
10 दिन के लिए आए थे, चार माह रुके ससुराल में
कराची निवासी रुमेज अली खान दिल्ली में अपनी पत्नी से मिलने आए थे। उनकी पत्नी भारतीय मूल की है। उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। वह भारत 10 दिन के लिए आए थे लेकिन लॉकडाउन के कारण चार महीने तक ससुराल में ही रहे। पाकिस्तान के हैदराबाद निवासी मोहम्मद अली ने बताया कि 27 फरवरी को परिवार समेत सिकंदराबाद में रहने वाली अपनी साली से मिलने आए थे। लॉकडाउन के दौरान वीजा की अवधि समाप्त हो गई।
सिकंदराबाद पुलिस कमिश्नर ने उनके परिवार के साथ पूरा सहयोग दिया। भारत सरकार ने उनके वीजा की अवधि बढ़ा दी। लगभग साढ़े तीन माह बाद वतन लौटने की खुशी तो है लेकिन गम भी है कि वह हैदराबाद का चारमीनार और अन्य एतिहासिक इमारतों को देख नहीं सके। भारत में उन्हें कोई भी मुश्किल नहीं हुई। बेशक पाकिस्तान में उनके कारोबार को नुकसान पहुंचा है। सिकंदराबाद में उनका तीन बार कोरोना टेस्ट हुआ। पाकिस्तानी नागरिकों का कहना है कि दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास के साथ निरंतर संपर्क में रहे। लॉकडाउन लागू करना बढ़िया फैसला था।
पंजाब के लोग अमृतसर में होंगे क्वारंटीन
दोनों देशों के नागरिकों को वतन भेजने के लिए नियुक्त प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण पाल सिंह ने बताया कि 25 से 27 जून तक 748 भारतीयों को आना था लेकिन किसी कारण वह नहीं आ सके। शुक्रवार को पाकिस्तान से आने वाले 114 भारतीयों में से 112 भारतीय उसी कोटे के हैं। सभी नागरिकों को कोरोना टेस्ट के बाद गृह राज्य भेज दिया जायेगा। जहां वह क्वारंटीन होंगे। पंजाब के 10 लोग अमृतसर में क्वारंटीन किए जाएंगे।
अमृतसर जेल में बंद पाकिस्तानी नागरिक का शव रेंजर को सौंपा
अमृतसर केंद्रीय जेल में बंद एक पाकिस्तानी नागरिक अब्दुल करीम की मौत हो गई थी। उसके शव को पाकिस्तान भेजा गया है। अमृतसर केंद्रीय जेल के सुपरिंटेंडेंट की मौजूदगी में पाकिस्तानी नागरिक का शव रेंजर को सौंपा गया। यह पाकिस्तानी चार वर्ष से जेल में सजा काट रहा था। इस पर वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद भारत में रहने का आरोप था। इसकी मौत दो दिन पहले जेल में हुई थी।