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Chandigarh: चार साल बाद चंडीगढ़ में गलसुआ से हालात चिंताजनक, कोरोना और डेंगू के खतरे के बीच मिले 106 मरीज
Tue, 26 Dec 2023 03:06 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 26 Dec 2023 03:06 PM IST
सार
केंद्र सरकार दो बीमारियां खसरा और रूबेला (एमआर) को खत्म करने की डब्ल्यूएचओ की रणनीति का पालन करती है। विभिन्न कारणों से भारत सरकार अपने नियमित टीकाकरण में एमआर वैक्सीन की सलाह देती है, एमएमआर की नहीं। इसलिए सरकार द्वारा अनुशंसित टीका गलसुआ से रक्षा करता है।
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चंडीगढ़
- फोटो : फाइल
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विस्तार
चंडीगढ़ में चार साल बाद बुजुर्गों और बच्चों में गलसुआ के 106 मामले सामने आए हैं। स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि 2019 के बाद से एक साल में दो से ज्यादा मामले सामने नहीं आए हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है क्योंकि विभाग को कोरोना और डेंगू के खतरे के बीच गलसुआ के मामले से बचाव को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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अस्पतालों में प्रतिदिन औसतन कण्ठमाला या गलसुआ के छह मामले देखे जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसे मामले आ रहे हैं जिनमें पूरा परिवार संक्रमित मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले दो महीनों से ये मामले बढ़े हैं। इसे लेकर इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) भी चिंतित है।
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आईएपी चंडीगढ़ के कार्यकारी बोर्ड के सदस्य डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने आरटीआई के जवाब में बताया है कि इस साल शहर में 106 मामले सामने आए हैं जो पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा है। डॉ. गौरव का कहना है कि चिंता की बात यह है कि इस बीमारी में बहरापन, अग्नाशयशोथ, मेनिंगोएन्सेफलाइटिस जैसी गंभीरता हो सकती है। इसके साथ ही एक ही समय में मेनिन्जाइटिस और एन्सेफलाइटिस व मस्तिष्क की सूजन जैसी जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो सकती है। डॉ. गौरव ने बताया कि वयस्कों में यह अधिक खतरनाक है क्योंकि यह महिलाओं में बांझपन का कारण बन सकता है। इस स्थिति को देखते हुए ही अगले वर्ष जनवरी में होने वाली आईएपी बैठक में इसे मुख्य मुद्दे के रूप में उठाया जाएगा।
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टीके को लेकर भ्रम की स्थिति
केंद्र सरकार दो बीमारियां खसरा और रूबेला (एमआर) को खत्म करने की डब्ल्यूएचओ की रणनीति का पालन करती है। विभिन्न कारणों से भारत सरकार अपने नियमित टीकाकरण में एमआर वैक्सीन की सलाह देती है, एमएमआर की नहीं। इसलिए सरकार द्वारा अनुशंसित टीका गलसुआ से रक्षा करता है। हालांकि, आईएपी शुरुआत से ही एमएमआर (खसरा, कण्ठमाला, रूबेला) का उपयोग कर रहा है। लेकिन यह टीका लगभग 500 रुपये प्रति खुराक की लागत से बाजार में उपलब्ध है। जिसके कारण सभी इसे अपने बच्चों को नहीं लगवा रहे हैं। बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि इससे जनता के बीच भ्रम पैदा हो गया है जो एमएमआर और एमआर के बीच अंतर नहीं जानते हैं।
पांच वर्षों में शहर में गलसुआ के मामले
वर्ष केस
2019 0
2020 0
2021 1
2022 2
2023 106
तीन महीने से स्थिति गंभीर
महीना केस
अक्तूबर 2023 6
नवंबर 2023 38
दिसंबर 44
क्या है गलसुआ... आप भी जान लें
गलसुआ या मम्प्स एक संक्रामक रोग है जो एक वायरस के कारण होता है। यह खांसने और छींकने से आसानी से फैलता है। सूजन आने के 1-2 दिन पहले से लेकर 5 दिन बाद तक यह रोग फैल सकता है।
इन लक्षणों पर करें गौर
बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, भूख न लगना इसके शुरुआती लक्षण हैं और फिर 2-3 दिनों के बाद कान या जबड़े के नीचे ग्रंथियों में सूजन आ जाती है, जो एक तरफ या दोनों तरफ हो सकती है।
इसका रखें ध्यान
-खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढक कर रखें।
- ऐसी चीजें साझा न करें जिन पर लार लगी हो जैसे पानी की बोतलें या कप।
- सूजन शुरू होने के 5 दिन बाद तक अन्य लोगों के संपर्क से बचना चाहिए।
- मास्क पहने रहें। वैक्सीनेशन ही बचाव का एकमात्र प्रभावी तरीका है।
- 9 महीने 15 महीने और 4-5 वर्ष पर एमएमआर की तीन डोज जरूरी हैं।
- गर्भवती महिलाएं संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें।
- गर्भवती महिलाएं एमएमआर वैक्सीन जरूर लगवाएं।