लॉकडाउन में बदल दी घर की तस्वीर, पूरा किया बागवानी का शौक...आज 105 गमलों में सजे हैं पौधे
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दो साल पहले सिविल इंजीनियर के पद से रिटायर हुए गुरबख्श सिंह ने लॉकडाउन का सदुपयोग किया। उनकी मेहनत का ही नतीजा है आज उनके घर में 105 गमलों में पौधे लगे हुए हैं। सबसे खास बात यह है कि वह खुद ही पौधों की कटिंग करते हैं। उनके बगीचे में अजवाइन, पुदीना, तुलसी, फरन, पालक, सरसों, गोभी जैसे कई पौधे और सब्जियां लगी हुई है।
सेक्टर 21 निवासी गुरबख्श सिंह ने कहा कि अपने घर के बगीचे में बैठकर चाय पीने में जो सुकून महसूस होता है वह कहीं नहीं है। उन्होंने बताया कि अपनी नौकरी के दौरान वह लैंडस्कैपिंग का काम कर चुके थे। इसी दौरान गार्डनिंग में उनकी रुचि बढ़ी।
रिटायर होने के बाद उन्हें गार्डनिंग करने का मौका नहीं मिला। लेकिन कोरोना के कारण लॉकडाउन लगने पर उन्होंने इसका फायदा उठाया और गार्डनिंग शुरू कर दी। उनका कहना है कि अब गार्डनिंग करने में उन्हें बहुत अच्छा महसूस होता है। आदत ऐसी हो गई है कि अब गार्डनिंग किए बिना नहीं रह सकता।
पत्नी और बेटा भी करते हैं सहायता
उनकी पत्नी बलजीत कौर रिटायर हैं और बेटा विदेश की कंपनी के साथ बिजनेस करता है। दोनों ही उनकी सहायता करते हैं। बलजीत कौर ने बताया कि अब उन्हें भी गार्डनिंग करने में अच्छा महसूस होने लगा है।
खराब पड़ीं लकड़ियों में पेंट कर बगीचे की रेलिंग बनाया
गुरबख्श सिंह ने बताया कि उनके घर के सामने मरम्मत का काम चल रहा था। इसमें खराब लकड़ी को घर के बाहर फेंक दिया गया था। उन्होंने उन लकड़ी को उठाकर उसकी कटिंग कर उसे पेंट किया और बगीचे के चारों तरफ रेलिंग बनाई। इसके अलावा छोटे- छोटे पत्थरों को कलर कर बगीचे में सजाया। लॉकडाउन में वह पूरा दिन लगे रहते थे। आज उनका बगीचा इतना हरा भरा है कि वह केवल दो घंटे अपने बगीचे को देते हैं।
मोहाली के गांव से लेकर आते हैं खाद
उन्होंने बताया कि पौधों में कच्ची खाद (कच्चा गोबर) डालने और ज्यादा पानी देने से कीड़ा लगता है। इसीलिए वह मोहाली के एक गांव से तीन-चार साल पुरानी गोबर की खाद लेकर आते हैं। इससे पौधों को किसी प्रकार की बीमारी नहीं लगती और न ही वह मरते हैं।
कीड़ों से पौधों को बचाती है लीथल की एक बूंद
उन्होंने बताया कि पौधों के लिए लीथल नामक दवाई काफी कारगर साबित होती है। उसकी मात्र एक बूंद से काफी पौधों को फायदा होता है। इस दवाई की गंध चारों तरफ फैल जाती है जिससे पौधों में चीटियां और दीमक नहीं लगती। इस दवाई से पौधों को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता।