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कांट्रैक्टर के पास 100 करोड़ की प्रॉपर्टी, अंजाम बुरा होगा, पर ऐसे चमकी किस्मत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 19 Aug 2017 02:26 PM IST
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fraud for employment
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एक कांट्रैक्टर के पास 100 करोड़ की प्रॉपर्टी मिली तो सनसनी फैल गई। हालांकि अंजाम खौफनाक होगा, लेकिन जानकर हैरानी होगी कि उसकी किस्मत आखिर कैसे चमकी। दरअसल, सिंचाई विभाग में टेंडर अलॉटमेंट में धांधलियों की जांच कर रहे पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने कांट्रैक्टर गुरिंदर सिंह और विभाग के सात वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। जिन अधिकारियों पर मामला दर्ज हुआ है, उनमें से चार विभाग से सेवानिवृत्ति ले चुके हैं।
विजिलेंस के मुताबिक कांट्रैक्टर ने चंडीगढ़, मोहाली, लुधियाना, पटियाला और नोएडा में अवैध तरीके से 100 करोड़ की तीस से अधिक प्रापर्टी जमा की है। यह जानकारी मिलने के बाद इन जगहों पर छापेमारी की गई। ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि एक्सईएन गुलशन नागपाल, एक्सईएन बजरंग लाल सिंगला, सुपरवाइजर विमल कुमार शर्मा, चीफ इंजीनियर रिटायर्ड परमजीत सिंह घुम्मन, चीफ इंजीनियर रिटायर्ड हरविंदर सिंह, एसडीओ रिटायर्ड कमिंदर सिंह देओल, चीफ इंजीनियर रिटायर्ड गुरदेव सिंह मिन्हा और सिंचाई विभाग के कुछ अन्य अधिकारियों, इंजीनियरों को कांट्रैक्टर गुरिंदर सिंह के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचने में अपने पद का दुरुपयोग करते पाया गया है।
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विजिलेंस के मुताबिक कांट्रैक्टर ने चंडीगढ़, मोहाली, लुधियाना, पटियाला और नोएडा में अवैध तरीके से 100 करोड़ की तीस से अधिक प्रापर्टी जमा की है। यह जानकारी मिलने के बाद इन जगहों पर छापेमारी की गई। ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि एक्सईएन गुलशन नागपाल, एक्सईएन बजरंग लाल सिंगला, सुपरवाइजर विमल कुमार शर्मा, चीफ इंजीनियर रिटायर्ड परमजीत सिंह घुम्मन, चीफ इंजीनियर रिटायर्ड हरविंदर सिंह, एसडीओ रिटायर्ड कमिंदर सिंह देओल, चीफ इंजीनियर रिटायर्ड गुरदेव सिंह मिन्हा और सिंचाई विभाग के कुछ अन्य अधिकारियों, इंजीनियरों को कांट्रैक्टर गुरिंदर सिंह के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचने में अपने पद का दुरुपयोग करते पाया गया है।
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राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया
षड्यंत्र के जरिए सरकारी पैसों की लूट हुई और राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया। कांट्रैक्टर गुरिंदर सिंह और उक्त अधिकारियों के खिलाफ मोहाली के विजिलेंस ब्यूरो फ्लाइंग स्क्वायड-1 पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान चीफ इंजीनियर (नहरें) पुष्पिंदर गर्ग की भूमिका भी जांची जाएगी, क्योंकि उन्होंने आरोपी गुरिंदर सिंह के खिलाफ दर्ज शिकायतों को बंद कर दिया था। इसी तरह अन्य ठेकेदारों पुष्पिंदर सिंह सिद्धू और खारा कांट्रैक्टर्स की भूमिका की भी जांच के दायरे में लाया गया है।
ऐसे हुए गुरिंदर सिंह के वारे-न्यारे
ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि साल 2006-07 के दौरान गुरिंदर सिंह की कंपनी की सालाना आमदन केवल 4.74 करोड़ रुपये थी, जो साल 2016-17 में बढ़कर 300 करोड़ रुपये हो गई। इसके अलावा इस ठेकेदार से कमीशन खाने के लिए निर्माण कार्यों की मियाद और मैटीरियल में घपलेबाजी की गई। साल 2011-12 के दौरान अबुल खुराना ड्रेन का काम भी एक्सईएन गुलशन नागपाल द्वारा गुरिंदर सिंह को टेंडर की शर्तों में ढील देकर अलॉट किया गया। इसके अलावा अन्य कई अनियमितताएं हैं, जो कि जांच में सामने आ रही हैं।
षड्यंत्र के जरिए सरकारी पैसों की लूट हुई और राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया। कांट्रैक्टर गुरिंदर सिंह और उक्त अधिकारियों के खिलाफ मोहाली के विजिलेंस ब्यूरो फ्लाइंग स्क्वायड-1 पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान चीफ इंजीनियर (नहरें) पुष्पिंदर गर्ग की भूमिका भी जांची जाएगी, क्योंकि उन्होंने आरोपी गुरिंदर सिंह के खिलाफ दर्ज शिकायतों को बंद कर दिया था। इसी तरह अन्य ठेकेदारों पुष्पिंदर सिंह सिद्धू और खारा कांट्रैक्टर्स की भूमिका की भी जांच के दायरे में लाया गया है।
ऐसे हुए गुरिंदर सिंह के वारे-न्यारे
ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि साल 2006-07 के दौरान गुरिंदर सिंह की कंपनी की सालाना आमदन केवल 4.74 करोड़ रुपये थी, जो साल 2016-17 में बढ़कर 300 करोड़ रुपये हो गई। इसके अलावा इस ठेकेदार से कमीशन खाने के लिए निर्माण कार्यों की मियाद और मैटीरियल में घपलेबाजी की गई। साल 2011-12 के दौरान अबुल खुराना ड्रेन का काम भी एक्सईएन गुलशन नागपाल द्वारा गुरिंदर सिंह को टेंडर की शर्तों में ढील देकर अलॉट किया गया। इसके अलावा अन्य कई अनियमितताएं हैं, जो कि जांच में सामने आ रही हैं।