10 रुपये में भरपेट खाना, लेने को रोज इस समय आना
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प्रधानमंत्री अन्नपूर्णा अक्षयपात्र योजना के तहत सोमवार को 10 रुपये में भोजन मिलने की शुरुआत हो गई। शहर में सेक्टर-26 सब्जीमंडी, लेबर चौक मनीमाजरा, लेबर चौक ईडब्ल्यूएस कॉलोनी धनास, लेबर चौक राम दरबार और कॉलोनी नंबर-4 इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में सोमवार शाम को करीब 600 पैकेट खाना बांटा गया।
पांच गाड़ियां इसके लिए लगाई गई हैं। इन स्थानों पर रोजाना शाम 6 से 9 बजे तक रात का खाना बांटा जाएगा। सेक्टर-26 सब्जी मंडी में जैसे ही लोगों को पता चला कि महज 10 रुपये में खाना मिल रहा है तो गाड़ी के चारों तरफ भीड़ उमड़ पड़ी।
इससे पहले सेक्टर-11 स्थित करुणा सदन में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने इस योजना की औपचारिक शुरुआत की। इस मौके पर मौजूद सांसद किरण खेर ने खाना चखकर भी देखा।
लोगों ने की सब्जी अलग से देने की मांग
प्रशासक ने भी मशीन से बाहर निकल रही रोटी को पकड़ कर चैक किया की कहीं कच्ची तो नहीं है। वहीं भोजन की गुणवत्ता परखने के लिए फूड सेफ्टी विंग और रेड क्रॉस के अधिकारियों की कमेटी गठित की गई है।
जो खाने की गुणवत्ता रोजाना जांचेगी। इस पूरी योजना के को-ऑर्डिनेशन का काम रेडक्रॉस देखेगी। इस मौके पर प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने कहा कि अच्छी सड़कें और लग्जरी सुविधाएं तो ठीक है, लेकिन जरूरतमंदों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वह इससे पहले कई शहरों में रहे हैं, लेकिन चंडीगढ़ में लोगों के लिए इतना बड़ा तोहफा एक अलग ही अनुभव है। वर्तमान में 10 रुपये का 100 रुपये जितना महत्व है।
ऐसे में महज 10 रुपये में शुद्ध पौष्टिक भोजन कर पाना बड़ी बात है। प्रशासक के आग्रह पर खाना बांटने के समय को 7 से 10 की बजाए शाम 6 से 9 किया गया। इस मौके पर सांसद किरण खेर ने सांसद निधि से 5 वैन भोजन बांटने के लिए देने की घोषणा भी की।
लोगों ने की सब्जी अलग से देने की मांग :
एक ही पैकेट में रोटी और उसमें लिपटी सब्जी देखकर लोगों ने अलग से सब्जी दिए जाने की मांग उठाई। साथ ही कुछ लोगों ने खाना खाने के बाद सब्जी थोड़ी कम होने की बात भी कही।
बताया यह भी जा रहा है कि प्रशासक के सामने सब्जी अलग से डब्बी में बंद करके देने की बात कही गई, लेकिन शाम को डब्बी की बजाए रोटी में ही सब्जी लपेट कर दी गई। हालांकि अधिकतर लोग इस पहल को सराहने में भी पीछे नहीं हटे। ग्रेन मार्केट में कुछ मजदूरों ने तो खाना मिलने के बाद हर हर मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए।
विभिन्न संस्थाओं से मिल रही मदद
शहर में लेबर डिपार्टमेंट, रेडक्रॉस और स्वास्थ्य विभाग की मदद से यह पूरी योजना चलाई जा रही है। विभिन्न एनजीओ और संस्थानों से मिली डोनेशन की मदद भी इसके लिए ली जा रही है।
करीब 70 लाख रुपये से करुणा सदन में भोजन तैयार करने के लिए मशीनें लगाई गई हैं। महिलाएं दोपहर 2 से 5 बजे तक खाना तैयार कर पैक करेंगी। इसके बाद वैन में इसे सभी चयनित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
एक पैकेट में 6 रोटी, सब्जी और अचार दिया जा रहा है। मोबाइल कैंटीन वाहन के दोनों और योजना का नाम लिखा होगा। जिससे लोगों को आसानी से इसका पता चल सके।
यह कैंटीन मुख्यतौर पर कंस्ट्रक्शन, इंडस्ट्रियल लेबर, स्लम वासियों, शहर में स्वास्थ्य लाभ और अन्य कार्यों से आने वाले लोगों को सस्ते रेट में पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने के लिए शुरू की गई है। कंस्ट्रक्शन यूनिट, इंडस्ट्रियल-स्लम एरिया और गवर्नमेंट अस्पतालों के आस-पास मोबाइल कैंटीन उपलब्ध रहेगी। शहर में 6 हजार लेबर और इंडस्ट्रियल वर्कर लेबर डिपार्टमेंट में पंजीकृत हैं। जबकि गैर पंजीकृत की संख्या 10 हजार के करीब है। इसके अलावा 50 हजार लोग अलग-अलग स्लम एरिया में बसे हुए हैं।