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खतरे में 1.5 करोड़ क्विंटल अनाज, हजारों टन में लगा घुन, प्री मानसून ट्रीटमेंट करना भूली एजेंसियां

Thu, 12 Jul 2018 09:43 AM IST
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 12 Jul 2018 09:43 AM IST
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1.5 million quintal grains in danger condition in Haryana
सांकेतिक तस्वीर
हरियाणा के गोदामों में पडे़ करोड़ों क्विंटल अनाज को घुन (कीड़ा) लगने से बर्बाद होने का खतरा बन गया है, क्योंकि इन गोदामों का रखरखाव करने वाली एजेंसियों हैफेड और हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन (एचडब्ल्यूसी) ने इस बार गोदामों का प्री-मानसून ट्रीटमेंट ही नहीं करवाया है।
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इसी को लेकर जहां फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) ने जहां दोनों एजेंसियों को नोटिस जारी किया है, वहीं इस नोटिस में ये स्पष्ट कर दिया गया है कि मानसून के दौरान यदि इन गोदामों रखा अनाज खराब हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेवारी दोनों एजेंसियों की होगी।
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उधर, विभागीय सूत्रों के अनुसार कई गोदामों में तो प्री मानसून ट्रीटमेंट के अभाव में अनाज को घुन लगना शुरू भी हो गया है। दोनों एजेंसियों के गोदामों में हजाराें क्विंटल गेहूं को घुन लग भी चुका है। इसकी जल्द रोकथाम न हुई तो गोदामों में रखा अनाज कीड़ा लगने से बर्बाद हो जाएगा।
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काबिलेगौर है कि हरियाणा में हैफेड के कवर्ड गोदामों की क्षमता 1.1 करोड़ क्विंटल है और हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के गोदामों की क्षमता 1.3 करोड़ क्विंटल है। फिलहाल इन दोनों एजेंसियों के गोदामों में 1.5 करोड़ क्विंटल से अधिक अनाज पड़ा है। जिसमें गेहूं और बाजरा शामिल हैं।

गोदामों में अनिवार्य होता है प्री-मानसून ट्रीटमेंट
हरियाणा में अनाज की खरीद हैफेड, हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन, एफसीआई और फूड एंड सप्लाई विभाग द्वारा की जाती है। इन सभी एजेंसियों के हरियाणा में कवर्ड गोदाम हैं। इन सभी गोदामों में मानसून  सीजन से पहले प्री-मानसून ट्रीटमेंट करना बहुत जरूरी होता है, ताकि मानसून के दौरान बरसातों की वजह से गोदामों में नमी के चलते अनाज को घुन (कीड़ा) न लगे।

प्री-मानसून ट्रीटमेंट के दौरान एल्युमीनियम फास्फाइड (सल्फास) को वैज्ञानिक तरीकों से गोदामों में उस जगह रखा जाता है, जहां  अनाज की बोरियों का स्टॉक रखना होता है। यह प्रक्रिया मानसून से पहले लाजिमी हो जानी चाहिए। लेकिन हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन ने इस बार ये ट्रीटमेंट ही नहीं किया है। जिस वजह से दोनों के गोदामों में पड़े अनाज को घुन लगना शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार फूड एंड सप्लाई विभाग का भी प्री-मानसून ट्रीटमेंट अभी तक पूरा नहीं हुआ है।

इस बार प्री-मानसून ट्रीटमेंट के लिए जो दवा खरीदनी थी, उस खरीद प्रक्रिया में थोड़ी देरी हो गई थी। इसलिए ट्रीटमेंट लेट हुआ। ट्रीटमेंट शुरू हो गया है। जल्द ही इस काम को निपटा लिया जाएगा। अनाज को खराब नहीं होने दिया जाएगा, समय पर रोकथाम हो जाएगी। - हरविंद्र कल्याण, चेयरमैन, हैफेड



किसी तकनीकी वजह से इस बार गोदामों का ट्रीटमेंट लेट हुआ। लेकिन अब ट्रीटमेंट चल रहा है। जल्द ही सभी गोदामों का ट्रीटमेंट हो जाएगा। गोदामों में अनाज पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। इसके लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। - आरसी बिदान, एमडी, हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन-
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