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Bihar News : शिक्षा मंत्री, गवर्नर के बाद अब केके पाठक की बीपीएससी से रार; ऐसा जवाब मिला है कि पढ़ते रह जाएंगे
Sat, 09 Sep 2023 08:16 AM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Sat, 09 Sep 2023 08:16 AM IST
सार
BPSC News : आयोग ने कहा- यह स्पष्ट रहे कि सत्यापन का यह कार्य आयोग की आंतरिक प्रक्रिया का मामला है और यह आयोग शिक्षा विभाग या राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन नहीं है। यह स्पष्ट न हो तो संविधान के सुसंगत अनुच्छेदों का अध्ययन कर लिया जाए।
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बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पिछले कुछ माह से चर्चा में रहने वाले शिक्षा विभाग और बिहार लोक सेवा आयोग के बीच रार ठन गई है। बीपीएससी ने पत्र भेजकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही बीपीएससी के अध्यक्ष अतुल प्रसाद ने भी सोशल मीडिया के जरिए जवाब दिया है। सरकार अपने अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति करती है और बाद में उन्हें बदल देती है। इससे हमें कोई चिंता नहीं होती है। ऐसे तत्व को जो टीआरआई-डीवी कैंसिल कराने की कोशिश क रह हैं, उन्हें और ज्यादा कोशिश करनी चाहिए। बीपीएससी के अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा है कि डॉक्यूमेंट वैरिफिकेशन जारी रहे है।
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बीपीएससी के सचिव ने शिक्षा विभाग के पत्र पर जताया आश्चर्य
इधर, शिक्षा विभाग के पत्र के जवाब में बीपीएससी ने जो पत्र भेजा है। वह 'अमर उजाला' आपको जस के तस पढ़ा रहा रहा है। बीपीएससी के सचिव रवि भूषण ने शिक्षा विभाग के पत्र पर आश्चर्य जताया। इसके बाद जवाबी पत्र में लिखा कि सूचित करना है कि प्रमाणपत्रों का सत्यापन पूर्व प्रचलित व्यवस्था के अनुरूप दो स्तरों पर किया जाता रहा है। पहला- आयोग के स्तर से जो परीक्षा फल के अंतिम प्रकाशन के पूर्व किया जाता है और दूसरा- अधियाची विभाग के स्तर से जो सफल अभ्यर्थियों के नियोजन के समय किया जाता रहा है। दोनों का अपना-अपना औचित्य है और दोनों एक दूसरे के पूरक है। बिना अपने स्तर से सत्यापन कार्य के आयोग द्वारा न ही कोई अनुशंसा भेजी जा सकती है और न ही कोई डोसियर। आयोग के इस सत्यापन कार्य में राज्य सरकार हमेशा सहयोग करती रही है और इसके लिए किस विभाग के किस पदाधिकारी / कर्मी को प्रतिनियुक्त किया जाए यह राज्य सरकार का विषय है। इस सम्बन्ध में कोई आपति / अनुरोध राज्य सरकार से किया जाना चाहिए।
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बीपीएससी ने कहा- भविष्य में इस तरह के पत्राचार की धृष्टता नहीं की जाय
यह स्पष्ट रहे कि सत्यापन का यह कार्य आयोग की आंतरिक प्रक्रिया का मामला है और यह आयोग शिक्षा विभाग या राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन नहीं है। यह स्पष्ट न हो तो संविधान के सुसंगत अनुच्छेदों का अध्ययन कर लिया जाए। यह भी स्पष्ट रहे कि आयोग के आंतरिक प्रक्रिया के औचित्य पर प्रश्न चिह्न लगाना या इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप करना और इस प्रकार आयोग पर दबाव डालने का प्रयास करना असवैधानिक अनुचित और अस्वीकार्य है। आश्चर्य है कि विभाग इन सब प्रावधानों को जानते हुए भी बिना प्रमाण पत्र के सत्यापन के ही आयोग से अनुशंसा की अपेक्षा कर रही है। उपरोक्त के आलोक में निदेशानुसार कहना है कि भविष्य में इस तरह के पत्राचार की धृष्टता नहीं की जाय ।
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