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Bihar : पटना हाईकोर्ट में बना न्याय का नया रिकॉर्ड, जस्टिस आरपी मिश्रा ने एक दिन में निपटाए 510 केस
Mon, 19 Jan 2026 09:37 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Mon, 19 Jan 2026 09:37 PM IST
सार
Patna High Court : पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने आज एक नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने एक दिन में शराबबंदी कानून से जुड़े 510 मामलों की सुनवाई कर देश को चौंका दिया।
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पटना हाई कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
बिहार की न्यायपालिका के इतिहास में सोमवार का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। पटना हाईकोर्ट में न्याय की रफ्तार ऐसी दिखी कि पुराने सारे कीर्तिमान ध्वस्त हो गए। जस्टिस आरपी मिश्रा की एकलपीठ ने इच्छाशक्ति और कार्यकुशलता की नई मिसाल पेश करते हुए महज एक दिन में शराबबंदी कानून से जुड़े 510 मामलों की सुनवाई कर देश को चौंका दिया।
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टूट गया पुराना रिकॉर्ड, कायम हुई नई मिसाल
कानूनी गलियारों में अब तक एक दिन में 500 से कम मामलों की सुनवाई को ही शिखर माना जाता था, लेकिन सोमवार को जस्टिस मिश्रा ने इस आंकड़े को पार कर एक नया बेंचमार्क स्थापित कर दिया। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान न केवल मामलों को सुना गया, बल्कि उनमें से 475 केसों का ऑन-द-स्पॉट निपटारा भी कर दिया गया। जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मुकदमों का निस्तारण हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत है।
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सुबह से शाम तक गूंजती रही पुकार
जस्टिस आरपी मिश्रा के कोर्ट रूम में सोमवार सुबह जब कार्यवाही शुरू हुई, तो मंजर आम दिनों से अलग था। कुल 510 केस लिस्टेड थे। कोर्ट ने बेहद पेशेवर तरीके से हर केस की क्रमवार पुकार लगाई। जिन 475 मामलों में अधिवक्ता उपस्थित थे, उनकी दलीलों को विस्तार से सुना गया। जिन मुकदमों में वकील मौजूद नहीं हो सके, केवल उन्हें ही अगली तारीख दी गई। कोर्ट ने तथ्यों के आधार पर रिकॉर्ड समय में आदेश पारित कर जेलों में बंद या अदालतों के चक्कर काट रहे सैंकड़ों लोगों के मामलों का भविष्य तय कर दिया।
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टीम वर्क ने दिखाई ताकत, सरकारी पक्ष की मुस्तैदी
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे केवल बेंच ही नहीं, बल्कि सरकारी वकीलों की कमांडो जैसी तैयारी का भी बड़ा हाथ रहा। बिहार सरकार की ओर से सहायक लोक अभियोजक चौबे जवाहर, रेणु कुमारी और नित्या नंद तिवारी ने मोर्चे को बखूबी संभाला। इस संबंध में अभियोजन पक्ष ने बताया कि, "हमने भारी-भरकम केस डायरियों का गहराई से अध्ययन किया था। हर आरोपी की क्राइम हिस्ट्री और केस से जुड़े तथ्य हमारी उंगलियों पर थे, जिससे माननीय न्यायालय को त्वरित निर्णय लेने में मदद मिली।
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कानूनी गलियारों में अब तक एक दिन में 500 से कम मामलों की सुनवाई को ही शिखर माना जाता था, लेकिन सोमवार को जस्टिस मिश्रा ने इस आंकड़े को पार कर एक नया बेंचमार्क स्थापित कर दिया। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान न केवल मामलों को सुना गया, बल्कि उनमें से 475 केसों का ऑन-द-स्पॉट निपटारा भी कर दिया गया। जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मुकदमों का निस्तारण हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत है।
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टीम वर्क ने दिखाई ताकत, सरकारी पक्ष की मुस्तैदी
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे केवल बेंच ही नहीं, बल्कि सरकारी वकीलों की कमांडो जैसी तैयारी का भी बड़ा हाथ रहा। बिहार सरकार की ओर से सहायक लोक अभियोजक चौबे जवाहर, रेणु कुमारी और नित्या नंद तिवारी ने मोर्चे को बखूबी संभाला। इस संबंध में अभियोजन पक्ष ने बताया कि, "हमने भारी-भरकम केस डायरियों का गहराई से अध्ययन किया था। हर आरोपी की क्राइम हिस्ट्री और केस से जुड़े तथ्य हमारी उंगलियों पर थे, जिससे माननीय न्यायालय को त्वरित निर्णय लेने में मदद मिली।