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बिहार बंद: मतदाता पुनरीक्षण के खिलाफ सड़कों पर उतरे महागठबंधन के कार्यकर्ता, तमाम जिलों में जनजीवन प्रभावित

Wed, 09 Jul 2025 09:36 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी पटना/सासाराम/गया/गोपालगंज/औरंगाबाद/जमुई/सारण/खगड़िया
पटना/सासाराम/गया/गोपालगंज/औरंगाबाद/जमुई/सारण/खगड़िया Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 09 Jul 2025 09:36 PM IST
सार

Bharat Bandh Protest Bihar: बिहार में चुनाव आयोग के मतदाता पुनरीक्षण अभियान के खिलाफ महागठबंधन के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए, जिससे तमाम जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ। जानें किस जिले में बंद का कैसा असर रहा...। 

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बिहार बंद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के खिलाफ इंडिया गठबंधन (महागठबंधन) द्वारा बुलाए गए बिहार बंद का असर बुधवार को पूरे राज्य में मिला-जुला देखने को मिला। कहीं सड़कों पर जाम लगा, तो कहीं ट्रेनें रोकने की कोशिश हुई, तो कई जिलों में बाजार सामान्य रूप से खुले रहे।

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सासाराम में दिखा विरोध का असर, पर नहीं रुकी ट्रेनें
रोहतास जिले के सासाराम में महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने पोस्ट ऑफिस चौक पर प्रदर्शन करते हुए सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। स्थानीय विधायक राजेश कुमार गुप्ता ने मतदाता पुनरीक्षण अभियान को भाजपा द्वारा प्रायोजित करार देते हुए कहा कि सरकार स्वायत्त संस्थाओं पर कब्जा कर रही है और गरीबों से वोट का अधिकार छीनने की साजिश कर रही है। विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सासाराम रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों को रोकने की कोशिश की, लेकिन पहले से सतर्क आरपीएफ और जीआरपी की कार्रवाई के चलते रेल यातायात बाधित नहीं हुआ।
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औरंगाबाद में कुछ घंटों के लिए थमा जनजीवन
औरंगाबाद जिले में बंद का असर मुख्य सड़कों तक सीमित रहा। यहां एनएच-19, एनएच-120 और 139 सहित अन्य महत्वपूर्ण मार्गों को महागठबंधन कार्यकर्ताओं ने सुबह से दोपहर तक बाधित किया। राजद, कांग्रेस, भाकपा माले समेत कई दलों के नेता सड़कों पर उतर कर धरने पर बैठ गए। बाजार खुला रहा, लेकिन सड़क पर जाम के कारण लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। दोपहर बाद यातायात सामान्य हो गया।
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जमुई में मंत्री को लौटना पड़ा पटना
जमुई जिले में चक्का जाम के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सुमित सिंह का काफिला सिकंदरा चौक पर जाम में फंस गया। मंत्री के अंगरक्षकों ने जाम हटाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने नहीं सुनी, जिसके चलते मंत्री को करीब 5-7 मिनट रुकने के बाद पटना लौटना पड़ा। जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर तक महागठबंधन कार्यकर्ताओं ने दोपहर तक सड़कों पर चक्का जाम किया, जिससे आम जनता को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
 
गया में बंदी का व्यापक असर
गया शहर में महागठबंधन का बंदी पूरी तरह सफल दिखा। सुबह से ही सड़कों पर महागठबंधन कार्यकर्ता उतर आए और कई स्थानों पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया। मुख्य सड़कों पर यातायात बाधित रहा और अधिकांश दुकानें बंद रहीं। राजद सांसद सुरेंद्र यादव ने कहा कि मैं मोदी से ज्यादा पढ़ा-लिखा हूं, और हम मतदाता पुनरीक्षण की इस प्रक्रिया को रुकवाकर ही रहेंगे।
 
गोपालगंज में मोटरसाइकिल रैली और दुकान बंद
गोपालगंज में महागठबंधन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मोटरसाइकिल रैली निकाली और सड़कों पर उतर कर चक्का जाम किया। बंद के दौरान अधिकांश दुकानें बंद रहीं और वाहनों की आवाजाही भी कम दिखी। प्रदर्शन के नेतृत्व में राजद, कांग्रेस, भाकपा माले, सीपीआई और वीआईपी के जिला स्तरीय नेता शामिल थे। नेताओं ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को गरीब और पिछड़े तबके के खिलाफ षड्यंत्र करार दिया।
 
नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि 2003 में पांच करोड़ मतदाताओं का पुनरीक्षण दो साल में हुआ था, तो अब आठ करोड़ मतदाताओं का काम एक महीने में कैसे पूरा होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया सत्ता पक्ष द्वारा चुनाव जीतने की साजिश है।
 
बंद को लेकर सुरक्षा रही चाक-चौबंद
राज्य भर में बंद के दौरान पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा। सड़कों पर जगह-जगह पुलिस बल और दंडाधिकारी तैनात किए गए थे। कई जगहों पर ड्रोन कैमरों से निगरानी भी की गई और प्रदर्शनकारियों की वीडियोग्राफी कराई गई। सासाराम में एसडीओ आशुतोष रंजन और डीएसपी वन दिलीप कुमार खुद पूरे समय स्थिति की निगरानी करते रहे।
 
सारण में बिहार बंद का दिखा व्यापक असर
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आह्वान पर महागठबंधन द्वारा आयोजित बिहार बंद का सारण जिले में खासा असर देखने को मिला। जिला मुख्यालय छपरा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी विरोध-प्रदर्शन का व्यापक नजारा दिखा। राजद, कांग्रेस, भाकपा माले, वीआईपी, वाम दलों समेत तमाम विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने बंद को सफल बनाने के लिए सड़कों पर उतरकर बाजार बंद कराया और राष्ट्रीय तथा राज्यीय राजमार्गों को अवरुद्ध किया।
 
नगर पालिका चौक बना प्रदर्शन का केंद्र
छपरा शहर के नगर पालिका चौक पर राजद जिलाध्यक्ष सुनील कुमार राय और पूर्व मंत्री व विधायक जितेंद्र कुमार राय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने हाथों में बैनर-झंडा लेकर विरोध प्रदर्शन किया। बाजार क्षेत्र को शांति पूर्वक बंद कराया गया, वहीं चारपहिया, तिपहिया और दुपहिया वाहनों की आवाजाही को भी रोक दिया गया, जिससे पूरे शहर में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्य को गरीब, दलित और पिछड़े वर्गों के मताधिकार को कमजोर करने की साजिश करार दिया।
 
जलालपुर में भी उग्र प्रदर्शन, NH बाधित
विधान परिषद के पूर्व प्रत्याशी सुधांशु रंजन और रितेश सिंह मुखिया के नेतृत्व में जलालपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित महेंद्र मिश्रा चौक पर छपरा-सलेमपुर राष्ट्रीय उच्च पथ को पूरी तरह जाम कर दिया गया। यहां महागठबंधन के सभी घटक दलों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया और केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनाव आयोग के निर्देश पर चल रहा गहन पुनरीक्षण कार्य सामाजिक न्याय के खिलाफ है और इससे गरीब तबके के मतदाताओं को वोटिंग से वंचित करने का रास्ता साफ किया जा रहा है।

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राजद नेता सुधांशु रंजन ने कहा कि इस सरकार की नीयत में खोट है। ये लोग लोकतंत्र की हत्या करना चाहते हैं। गरीबों को उनके सबसे बड़े अधिकार यानी मत देने के अधिकार से वंचित करने की साजिश चल रही है। हमलोग इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अपने फायदे के लिए मतदाता सूची में छेड़छाड़ करवा रही है, ताकि समाज के कमजोर वर्ग की राजनीतिक भागीदारी कमजोर की जा सके।
 
बिहार बंद का खगड़िया में व्यापक असर
बिहार में महागठबंधन के आह्वान पर आयोजित बिहार बंद का खगड़िया जिले में व्यापक असर देखा गया। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में धांधली और पक्षपात के आरोपों को लेकर राजद, कांग्रेस और अन्य घटक दलों के सैकड़ों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल के जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने एनएच-31 को सुबह से ही जाम कर दिया, जिससे आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया।
 
राजेंद्र चौक पर जाम, सड़कों पर टायर जलाकर प्रदर्शन
शहर के प्रमुख इलाके राजेंद्र चौक पर महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी। सड़कों पर टायर जलाकर प्रदर्शन और नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया। बंद के चलते ऑटो, रिक्शा, ट्रक और बसें थमी रहीं, जिससे पूरे शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा गई।
 
भीषण गर्मी में यात्री परेशान, दुकानें बंद
बंद का सबसे अधिक असर आम लोगों, खासकर यात्रियों पर पड़ा। भीषण गर्मी में लोग घंटों सड़कों पर फंसे रहे। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे खासे परेशान नजर आए। वहीं, बंद समर्थकों के द्वारा बाजार में दुकानदारों से शांति पूर्वक दुकानें बंद करने की अपील की गई, जिसका व्यापक असर दिखा। शहर के अधिकांश बाजार पूरी तरह बंद रहे।
 
आंदोलन को बताया लोकतांत्रिक अधिकार
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव चंदन यादव, जिलाध्यक्ष अविनाश कुमार पासवान, नगर अध्यक्ष रौशन चंद्रवंशी, प्रखंड अध्यक्ष मनोज चौधरी सहित महागठबंधन के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इन नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया के माध्यम से कमजोर वर्गों को मतदान से वंचित करने की साजिश रची जा रही है। यह लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है और इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
 
नेताओं ने कहा कि सरकार चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर, सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने के इरादे से पुनरीक्षण करवा रही है। यह कदम संविधान और मतदाता अधिकारों के खिलाफ है। महागठबंधन इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और उग्र रूप देगा।

 
प्रशासन सतर्क, चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात
बंद को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर रखी थी। सभी संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किए गए थे। कहीं से किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है, लेकिन सुबह से दोपहर तक जिले भर में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। ट्रेड यूनियनों की हड़ताल और महागठबंधन के बंद का मिला-जुला असर शहर के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी देखा गया। सड़क मार्ग बाधित होने से आवागमन ठप रहा और रोजमर्रा की गतिविधियों पर सीधा असर पड़ा।
 
बाजार पर मिला-जुला असर, जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित
बिहार बंद के दौरान जहां कुछ जिलों में दुकानें खुली रहीं, वहीं गया और गोपालगंज जैसे जिलों में बाजार पूरी तरह बंद रहे। बंद का असर कुछ घंटे ही रहा, जिसके बाद दोपहर बाद अधिकतर जिलों में यातायात और जनजीवन सामान्य हो गया। हालांकि सुबह के समय आम यात्रियों को सड़क और ट्रेनों में परेशानियों का सामना करना पड़ा।
 
राजनीतिक माहौल गरमाया, आगे और तेज होगा आंदोलन?
बिहार बंद के सफल आयोजन के बाद महागठबंधन के नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि चुनाव आयोग मतदाता पुनरीक्षण अभियान को वापस नहीं लेता, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। राजद, कांग्रेस, माले और अन्य घटक दलों के नेताओं ने कहा कि यह लोकतंत्र पर हमला है और गरीबों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश है। बंद के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन को प्राथमिकता दी गई, हालांकि कुछ स्थानों पर उग्र नारेबाजी और टायर जलाने की घटनाएं भी हुईं। फिर भी किसी बड़े हिंसक टकराव या गंभीर अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

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