Bihar Polls: भाजपा ने जताया मूल वोट बैंक पर भरोसा, अगड़ा-वैश्य को 64% टिकट; दगा करने वालों को सबक
भाजपा अरसे से अपने मूल बोट बैंक में कुशवाहा बिरादरी को शामिल करना चाहती है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने इस बिरादरी के सम्राट चौधरी को पहले अध्यक्ष और बाद में डिप्टी सीएम बना कर उनका कद बढ़ाया। अब पार्टी ने सर्वाधिक सात टिकटें इस बिरादरी को दी हैं। इसके अलावा अति पिछड़ा वर्ग को 10 टिकट दिए हैं।
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बिहार चुनाव की वैतरणी पार करने के लिए भाजपा ने इस बार भी अपने मूल वोट बैंक पर मजबूत भरोसा किया है। पार्टी ने अपने कोटे की 101 सीटों में से 64 सीटें अगड़ा वर्ग और वैश्य बिरादरी को दी हैं। सात टिकट कुशवाहा बिरादरी को देकर इस बिरादरी में पैठ बनाने की कोशिश की है। बीते चुनाव की तरह ही पार्टी ने इस बार भी 13 महिलाओं को टिकट दिया है। राज्य में अगड़ा वर्ग और वैश्य बिरादरी को साधे रखने के लिए पार्टी ने इस बार भी वरीयता दी है। बीते चुनाव में अपने कोटे की 110 सीटों में से पार्टी ने अगड़ा वर्ग को 50 सीटें दी थीं। इस बार यह संख्या 49 (राजपूत 21, भूमिहार 16, ब्राह्मण 11 और कायस्थ 1) है। इसके बाद पार्टी ने वैश्य बिरादरी को पिछले चुनाव के बराचर 15 सीटें दी हैं।
भाजपा अरसे से अपने मूल बोट बैंक में कुशवाहा बिरादरी को शामिल करना चाहती है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने इस बिरादरी के सम्राट चौधरी को पहले अध्यक्ष और बाद में डिप्टी सीएम बना कर उनका कद बढ़ाया। अब पार्टी ने सर्वाधिक सात टिकटें इस बिरादरी को दी हैं। इसके अलावा अति पिछड़ा वर्ग को 10 टिकट दिए हैं।
आधी आबादी को समान मौका
पार्टी ने बीते चुनाव की तरह ही इस चुनाव में भी 13 महिलाओं को मौका दिया है। बीते चुनाव में कुल 26 महिला उम्मीदवार जीती थी, इनमें राजग के 15 (भाजपा 9. जदयू 6) विधायक थे। इस बार जदयू ने भी भाजपा की तरह 13 महिला उम्मीदवारों को मौका दिया है। इसके अलावा बीते चुनाव की तरह ही भाजपा ने इस बार भी एक भी मुसलमान की टिक नहीं दिया है। राजग की ओर से अब तक घोषित, पीदणारों में सिर्फ जदयू से 4 मुसलमानों को चुनाव लड़ने का मौका मिला है।
टिकट वितरण में भाजपा ने पाला बदलने वाले विधायकों पर कृपा बरसाई है। विश्वास मत के दौरान राजद की लाइन से हट कर नीतीश सरकार का समर्थन करने वाले भरत बिंद और संगीता कुमारी को मौका दिया गया है।
यादव बिरादरी की जदयू से कराई भरपाई
इस चुनाव में पार्टी ने पिछले चुनाव के मुकाबले यादव बिरादरी को 9 सीटें कम दी हैं। इस बार इस बिरादरी के महज 6 लोगों को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि इसकी भरपाई जदयू (8 उम्मीदवार) से कराई है। पार्टी की रणनीति गठबंधन के जरिए विपक्षी महागठबंधन के मूल बोट बैंक माने जाने बाले यादव बिरादरी को सकारात्मक संदेश देने की है।