Bihar News : भागलपुर में पीएम मोदी ने लिया खगड़िया का नाम; किसानों के लिए क्या हो रहा काम, जानें यहां
Bihar : भागलपुर पहुंचे पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान खगड़िया जिले का भी नाम लिया। उन्होंने एफपीओ यानि किसान उत्पादक संगठन का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के मूल कृषि उत्पादन मक्का, केला और धान के लिए यहां के किसान रजिस्टर्ड हो रहे हैं।
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेनद्र मोदी ने सोमवार को भागलपुर में किसान निधि सम्मान योजना की किस्त को जारी किया। इस दौरान उन्होंने खगड़िया का भी नाम लिया, जिसमें उन्होंने एफपीओ यानि किसान उत्पादक संगठन का जिक्र करते हुए कहा कि खगड़िया के मूल कृषि उत्पादन मक्का, केला, धान के लिए यहां के किसान रजिस्टर्ड हो रहे हैं। इसका लाभ भी उनको मिल रहा है। तो आईए जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खगड़िया का क्यों नाम लिया और यहां के किसान एफपीओ पर कैसे काम करते है। साथ ही यह भी जानते हैं कि एफपीओ से जुड़ने वाले किसानों को इससे क्या क्या फायदा मिल रहा है।
12 एफपीओ खगड़िया में है संगठित
किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) खगड़िया में 12 अभी तक रजिस्टर्ड हैं। जिनको कृषि विभाग के आत्मा के द्वारा संगठन विस्तार और मार्केटिंग के लिए मदद दी जा रही है। इससे जुड़ने वाले किसानों को संगठित रुप से उनके फसल के उपज और उसके बिक्री को लेकर सहायता मिलती है। इस संगठन से जुड़कर किसान अपनी फसल की सही कीमत पा रहे हैं। उप परियोजना निदेशक आत्मा सह जिला कृषि विपनन पदाधिकारी भारत भूषण की मानें तो विभाग ऐसे संगठनों से जुड़े किसानों को कृषि की बारीकी एवं बाजार में उत्पादन बेचने में मदद करती है।
पहुंच रहा है आर्थिक फायदा
खगड़िया जिले मूलत: तीन फसल मक्का, केला और धान की उपज के लिए सूबे में ही नहीं बल्कि देश में जाना जाता है। जो यहां के किसानों के आय का मूल साधन भी है। लेकिन इन फसलों के उपज की सही कीमत नहीं मिलने से किसानों को कभी कभी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। लेकिन जो किसान एफपीओ के तहत संगठित हो जाते हैं उनको बाजार में उनके फसल की सही कीमत मिलती है। उप-परियोजना निदेशक (आत्मा) की माने तो इस संगठन में अन्य किसान भी शामिल हो सकते हैं। इसमें जुड़ने वाले किसानों को विभाग की तरफ से सभी जानकारी मुहैया कराई जा रही है। फसल के उपज से लेकर बाजार में उनके उत्पादन की कीमत समय समय पर किसानों को दी जा रही है। जिससे उनको आर्थिक फायदा पहुंच रहा है।
60 हजार हेक्टेयर में होती है मक्के की फसल
खगड़िया जिले में प्रतिवर्ष करीब 50 हेक्टेयर में मक्के का फसल उपज किया जाता है। कृषि जानकारों की माने तो प्रति एकड़ इसकी उपज औसतन 40 क्विंटल है। याने प्रति वर्ष जिले में इसका सालाना एक लाख 55 हजार मीट्रिक टन उत्पादन होता है। जबकि प्रतिवर्ष केले का उत्पादन यहां करीब 38 हजार मीट्रिक टन का उत्पादन होता है। जबकि धान की फसल प्रतिवर्ष 20 हजार हेक्टेयर भूमि में होती है।
जाने क्या है एफपीओ
एफपीओ का मतलब है किसान उत्पादक संगठन। यह संगठन छोटे किसानों को कृषि से संबंधित सभी जरुरी जानकारी मुहैया कराता है। यह संगठन एक सहकारी समिति के रुप में काम करती है। जिसके अध्यक्ष व सचिव के अलावे कई अधिकारियों का चयन होता है। यह पूरा संगठन कृषि विभाग की देखरेख में चलाया जाता है। जानकारी दे दें कि किसान उत्पादक संगठनों के पीछे की अवधारणा यह है कि किसान, जो कृषि उत्पादों के उत्पादक हैं, समूह बना सकते हैं और भारतीय कंपनी अधिनियम के तहत खुद को पंजीकृत कर सकते हैं।
(इनपुट- अभिजीत सिन्हा, खगड़िया)