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विवाह में बाधक मंगल ग्रह की जमीन लाल क्यों

टीम डिजिटल

इन दिनों मंगल पर जीवन का अस्तित्व ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि में मंगल जीवन दाता नहीं जीवन में संकट पैदा करने वाला ग्रह है। मंगल को भी सूर्य, शनि, राहु और केतु के समान पाप ग्रह की श्रेणी में रखा गया है। क्योंकि इसकी प्रकृति उग्र है। यह युद्घ और अलगाव बढ़ाता है।

कुण्डली में मंगल की अनुकूल स्थिति नहीं होने पर वैवाहिक जीवन में तनाव और आपसी मतभेद के कारण दांपत्य जीवन कलहपूर्ण हो जाता है। मंगल के अशुभ योग के कारण पति-पत्नी को एक दूसरे का वियोग भी सहना पड़ता है।

मंगल प्रतिकूल होने पर दुर्घटना एवं रक्त संबंधी रोग के कारण व्यक्ति को पीड़ा सहनी पड़ती है। मंगल के कुप्रभाव के कारण व्यक्ति को शल्य चिकित्सा का भी कष्ट भोगना पड़ता है।

मंगल के इस अशुभ प्रभाव का धार्मिक कारण यह माना जाता है कि यह भगवान विष्णु के वराह अवतार से उत्पन्न है। हिरण्याक्ष के वध के उपरान्त जब वराह भगवान जब अपने लोक लौटने लगे तब पृथ्वी ने उनसे पुत्र की इच्छा प्रकट की। वराह भगवान की कृपा से पृथ्वी को एक पुत्र उत्पन्न हुआ।

इसके बाद वराह भगवान वापस अपने लोक लौट आए। पृथ्वी का पुत्र मंगल कहलाया। वराह भगवान द्वारा पृथ्वी को छोड़कर चले जाने से मंगल कुपित थे। इन्होंने प्रण किया कि जिस प्रकार वराह ने इनकी माता का त्याग किया है यह भी भगवान की बनाई सृष्टि में पति-पत्नी में अलगाव का कारण बनकर लोगों को कष्ट देंगे।

इनके क्रोधी स्वभाव और उग्र व्यवहार के कारण मंगल का मुख लाल है। खगोल विज्ञान में मंगल को लाल रंग का ग्रह बताया गया है। इस लाल ग्रह पर मनुष्य के पांव पड़ेंगे और मंगल की लाल धरती हरी भरी होगी यह विचारणीय प्रश्न है।
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