बोलने की कला में आप कुशल हैं और घूमना-फिरना पसंद है तो आपका जन्म नक्षत्र मृगशिरा हो सकता है। नक्षत्रों में इसका स्थान पांचवां है। इस नक्षत्र का आधा भाग वृष राशि में आता है और आधा भाग मिथुन राशि में। इसलिए इस नक्षत्र का प्रभाव इन दोनों राशियों पर दिखता है।
ऐसे व्यक्ति दिखने में सामान्य तौर पर सुंदर तथा विनोदी स्वभाव वाले होते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है जिसके प्रभाव के कारण व्यक्ति खोजी प्रवृति का होता है, घूमना-फिरना इन्हें काफी अच्छा लगता है। ऐसे व्यक्ति बहादुर और दृढ़ निश्चयी होते हैं।
इनके स्वभाव में चंचलता और उग्रता दोनों ही पायी जाती है। मंगल अनुकूल नहीं होने पर इस नक्षत्र के व्यक्ति बहुत जल्दी क्रोधित हो जाते हैं। वाद-विवाद और तर्क-विर्तक भी इनके व्यक्तित्व का हिस्सा होता है।
संगीत एवं साहित्य में इनकी विशेष रूचि होती है। ऐसे व्यक्ति स्थायी काम करना पसंद करते हैं। यह बातों-बातों में व्यंग्यात्मक शब्दों का भी खूब प्रयोग करते हैं लेकिन अंदर से उदार और व्यवहार कुशल होते हैं।
रचनात्मक विषयों में इनकी रूचि होती है। मित्रों एवं सगे-सबंधियों से खुद को जोड़े रखने की कोशिश करते हैं। लेकिन अगर कोई इन्हें धोखा देता है तो सजा दिये बिना इन्हें चैन नहीं मिलता है।
इस नक्षत्र के व्यक्ति थोड़े शंकालु स्वभाव के होते हैं। लोगों पर यह पूरी तरह से कभी विश्वास नहीं कर पाते हैं जिससे कभी-कभी दांपत्य जीवन भी प्रभावित होने लगता है।
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