चैत्रशुक्ल प्रतिपदा आज दोपहर दोपहर 03: 05 बजे उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग में हो रहा है। उस समय क्षितिज पर कर्क लग्न का उदय हो रहा होगा, परन्तु संवत्सर का संकल्पमान सूर्योदय कालीन तिथि 21 मार्च से मान्य होगा।
इसीदिन से चैत्र नवरात्र भी शुरु हो रहा है। सभी मांगलिक कार्यों, श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान का संकल्प ''कीलक'' नामक संवत् का उच्चारण करते हुए किया जाएगा। वर्षा की स्वामिनी रोहिणी का वास समुद्र में रहेगा। इस कारण वर्षा अधिक होगी, धान्यादि की पैदावार प्रचुर मात्रा में रहेगी।
संवत् का वाहन महिष तथा वास माली के घर रहेगा। जिसका फल सकारात्मक रहेगा। वर्ष के दशाधिकारियों में बृहस्पति एवं चन्द्र को तीन-तीन, शनि के पास दो और मंगल तथा बुध को एक-एक अधिकार मिला हुआ है जो शुभ संकेत है।