करीब एक साल से गुरु अपनी शत्रु राशि मिथुन में चल रहा है। यह भारत के लिए अनुकूल स्थिति नहीं है क्योंकि स्वतंत्र भारत का लग्न वृष और इसकी राशि मिथुन है।
इस कारण से गुरु अभी भारत की राशि से बारहवें घर में बैठा है यही कारण है बीते एक साल में देश की राजनीति में काफी उठा पटक और जनता को कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
पढ़ें, 31 मार्च से नया संवत् शुरू, कैसा रहेगा साल 2014-15?ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बारहवें राशि में बैठा गुरु सत्ता परिवर्तन और वनवास भी देता है। इसलिए वर्तमान सरकार को सत्ता गंवानी पड़ सकती है। देश की राजनीति में इनकी पकड़ ढ़ीली पड़ सकती है।
18 जून को गुरु मिथुन राशि से निकलकर अपने मित्र राशि कर्क में पहुंचेंगे। इससे भारत के लिए शुभ स्थिति बननी शुरु होगी। भारत सरकार द्वारा जनहित के कार्यों पर ध्यान दिया जाएगा और जनता में उत्साह की लहर रहेगी।
पढ़ें,खजुराहो की कामुक मूर्तियों की हैरान करने वाली दास्तानहालांकि नवंबर तक शनि की ढैय्या का प्रभाव रहने के कारण विकास की रफ्तार धीमी रहेगी। वित्तीय स्थिति बीच-बीच में डावांडोल होती रहेगी। अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
पढ़ें, धन और शादी की बाधा दूर करता है शनि का यह रत्न