रत्नों के जादू से दुनिया वाकिफ है और आप भी होंगे। नीलम ऐसा रत्न है जिसके विषय में माना जाता है कि यह मेहरबान हो जाए तो भिखारी को भी राजा बना सकता है। इसी प्रकार हीरा सुख-समृद्घि और सौन्दर्य को बढ़ाता है। शुक्र का ही एक रत्न है फिरोजा। इस रत्न की खूबी यह है कि इसे धारण करने से रिश्तों की डोर मजबूत होती है और प्यार बढ़ता है।
जरूरी नहीं कि प्रेमी प्रेमिका और पति-पत्नी ही इसे धारण करें। आप जिससे भी अपने रिश्ते की डोर मजबूत करना चाहते हैं उसे यह रत्न उपहार में दें। लेकिन यह भी ध्यान रखें कि आप जैसा फिरोजा उपहार में दे रहे हैं, खुद भी वैसा ही फिरोजा धारण करें। इस रत्न के विषय में माना जाता है कि स्वयं खरीदकर धारण करने की बजाय किसी से उपहार मिलने पर इसका असर ज्यादा होता है।
फिरोजा के लाभ शुक्र प्रेम का कारक ग्रह होता है। इस रत्न को धारण करने से शुक्र का शुभ फल प्राप्त होता है। यह राहु एवं केतु के अशुभ प्रभाव को भी दूर करता है जो भ्रम और मानसिक उलझनों को बढ़ाने वाला ग्रह है। इसे धारण करने से ऊपरी चक्कर, भूत-प्रेत बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है।
फिरोजा रत्न की पहचान पौराणिक मान्यता के अनुसार फिरोजा रत्न दैत्यराज बालि की नसों से बना है। इसे अंग्रेजी में टर्काइज कहते हैं। इस रत्न का रंग गहरा नीला, आसमानी और हरापन लिए होता है। सबसे उत्तम फिरोजा नीले रंग का होता है इसलिए इसकी मांग अधिक रहती है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति की राशि कुंभ हो अथवा जिनका जन्म दिसम्बर महीने में हो उन्हें फिरोजा रत्न अवश्य धारण करना चाहिए। जो व्यक्ति केतु के अशुभ प्रभाव के कारण कष्ट प्राप्त कर रहे हों उन्हें भी यह रत्न धारण करना चाहिए।
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