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खाने का तरीका बदलिए मजबूत हो जाएंगे ग्रह

आपने देखा होगा कि कुछ लोगों को मीठा अधिक पसंद आता है तो कुछ लोगों का नमकीन अच्छा लगता है। कुछ लोग समोसा तो कुछ रसगुल्ला खाना अधिक पसंद करते हैं। खान-पान में लोगों की पसंद अलग-अलग होती है। इसका कारण ग्रहों का प्रभाव है। लाल किताब में इस बात का संकेत दिया गया है।

लाल किताब कहती है कि व्यक्ति को वही खाना चाहिए जिसकी उसके पास कमी है। यहां कमी का मतलब है, जो ग्रह कुण्डली में कमज़ोर है उस ग्रह से संबंधित चीजें खाएं। आमतौर लोगों की रूचि भी इसी अनुरूप होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो व्यक्ति उन्हीं चीजों की ओर आकर्षित होता है जिसकी उसके पास कमी होती है जैसे अगर आपने खूब मिठाई खा ली है इसके बाद अगर आपको मिठाई और नमकीन दें तो आप नमकीन खाना अधिक पसंद करेंगे।

लाल किताब के अनुसार जिस व्यक्ति का गुरू कमज़ोर होता है उसे पीली चीजें अधिक पसंद आती है। ऐसा व्यक्ति चने की दाल, सोनपापड़ी, बेसन के लड्डू एवं हल्दी खाना अधिक पसंद करता है। कमज़ोर मंगल वाले व्यक्ति की पसंद मसूर की दाल, शहद एवं लाल मिर्च होती है। इन्हें मीठा भी काफी पसंद होता है।  

जिनकी कुण्डली में सूर्य कमज़ोर होता है ऐसे लोग नमकीन भोजन के शौकीन होते हैं। इन्हें तेज नमक खाना पसंद होता है। चन्द्रमा और शुक्र दोनों का रंग सफेद है। जिनकी जन्मपत्री में चन्द्र या शुक्र कमज़ोर होता है वे दूध, दही, चावल, मिसरी एवं आईसक्रीम के दीवाने होते हैं।

उड़द, तिल, खिचड़ी, सरसो तेल आदि का कारक शनि माना जाता है। कमजोर शनि वाले व्यक्तियों को तैलीय चीजें काफी पसंद आती हैं। शनि की दशा में तैलीय चीजें अधिक मात्रा में खाने से शनि का कुप्रभाव दूर होता है। जिनका बुध कमज़ोर होता है उन्हें मूंग की दाल, साग और मटर रूचिकर लगता है।
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