कैरियर को लेकर सभी व्यक्ति परेशान रहते हैं। कुछ लोग दिन-रात सरकारी क्षेत्र में अधिकारी बनने के लिए परिश्रम करते रहते हैं। लेकिन इनमें से कई सफल होते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते हैं जिन्हें मेहनत करने के बावजूद कामयाबी नहीं मिलती है।
ज्योतिषशास्त्र कहता है कि इसका एक बड़ा कारण है व्यक्ति की कुण्डली में मौजूद ग्रह नक्षत्रों की दशा। सरकरी क्षेत्र में अधिकारी बनने के लिए सूर्य और गुरू दोनों की अच्छी स्थिति जरूरी है। ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा बताती हैं कि जिनकी कुण्डली में नवम स्थान में गुरू धनु, मीन या सिंह राशि में बैठा होता है वह बहुत ही भाग्यशाली होते हैं।
पढ़ें, साप्ताहिक राशिफल 18 से 24 नवंबर तक कैसा रहेगा आपका समयऐसे व्यक्ति की किस्मत हमेशा साथ देती है। व्यक्ति सरकारी क्षेत्र में उच्च अधिकारी बनता है। इनके पास भरपूर धन एवं भौतिक सुख के हर साधन मौजूद होते हैं। गुरू का ऐसा योग बहुत ही मुश्किल से बनता है। दसवें एवं पहले, एवं पांचवें स्थान में सिंह, धनु या मीन में बैठा गुरू भी शुभ फलदायी होता है।
गुरू को ज्योतिषशास्त्र में धन एवं धर्म का भी कारक कहा गया है। कुण्डली में गुरू के बलवान होने पर व्यक्ति धार्मिक प्रवृति का होता है। इनके कैरियर का संबंध धार्मिक संस्थाओं, मंदिर, मठ का प्रबंधन तथा न्यायिक क्षेत्र से हो सकता है।
जिनकी जन्मपत्री में गुरू धन अथवा आय स्थान यानी दूसरे या ग्यारहवें में घर में होता है वह शेयर, बैंकिंग, कर्ज लेन-देन के माध्यम से खूब धन कमा सकते हैं।
ज्योतिषशास्त्र में जन्मपत्री के पांचवें घर को शिक्षा का स्थान माना जाता है। इस घर में बैठा गुरू व्यक्ति की रूचि पढ़ने-लिखने में बढ़ता है। ऐसा व्यक्ति उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। इनके कैरियर का संबंध पढ़ने-लिखने से हो सकता यह शिक्षक और सलाहकार के तौर पर नाम,यश एवं धन कमाते हैं।