ज्योतिषशास्त्र में कुछ अशुभ समयों का उल्लेख किया गया है इनमें भद्रा नाम लिया जाता है। इस समय में विवाह, बच्चे का मुंडन, घर बनाने की शुरुआत, गृहप्रवेश और रक्षा बंधन आदि काम निषेध मना हैं।
कुछ काम ऐसे भी हैं जिन्हें करने के लिए भद्रा काल को शुभ और ग्राह्य माना गया है। यज्ञ करना, शत्रु को पराजित करना, अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग करना, प्रेम प्रणय, मुकदमा करना, आप्रेशन करना, अग्नि संबंधी कार्य एवं पशुओं की खरीद बिक्री का काम शुभ माना गया है।
भद्रा काल को वैसे तो विवाह संस्कार के लिए शुभ नहीं माना गया है। लेकिन कुछ स्थितियों में भद्रा दोष का परिहार हो जाता है। पीयूषधारा के अनुसार दिन की भद्रा रात में रात की भद्रा दिन में आ जाए तो वह भद्रा दोषरहित हो जाती है और उसमें किसी तरह की अशुभता नहीं रहती है।