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कानपुर: व्यावसायिक सलाह तब तक अपराध नहीं जबतक मिलीभगत साबित न हो

कानपुर जीएसटी सीए एसोसिएशन की ओर से शुक्रवार को आर्यनगर स्थित क्लब में जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए निर्णयों पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसी भी पेशेवर (सीए या टैक्स प्रोफेशनल) की ओर से अपने क्लाइंट को दी गई व्यावसायिक सलाह को तब तक अपराध या साजिश का हिस्सा नहीं माना जा सकता। जब तक कि प्रोफेशनल की स्वयं दुर्भावनापूर्ण मंशा या मिलीभगत साबित न हो। मुख्य वक्ता, सीए रेखा धमाकर ने आर्थिक अपराधों की जांच के दौरान टैक्स प्रोफेशनल्स के कानूनी संरक्षण पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी केवल आर्थिक घोटाले के मामलों में संबंधित ऑडिटर से सहयोग ले सकते हैं। और ऑडिटर अपने पास उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही जांच में सहयोग करने के लिए बाध्य हैं। सीए रीना भार्गव ने निरीक्षण, सर्च एवं जब्ती के नियमों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीएसटी अधिकारी संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी की अनुमति से ही परिसर का निरीक्षण कर सकते हैं। सर्च का अधिकार तभी है जब कर चोरी या स्टॉक छुपाने का ठोस कारण मिले। जांच दल केवल व्यवसाय से संबंधित स्टॉक, बही-खाते या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त कर सकता है। व्यक्तिगत संपत्ति जैसे नकदी, ज्वेलरी, कार या मोबाइल जब्त नहीं की जा सकती। सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने जीएसटी काउंसिल द्वारा गिरफ्तारी संबंधी कठोर प्रावधानों को वापस लेने के फैसले को अच्छा निर्णय बताया। कहा कि इससे व्यापारियों के मन से पुलिस और विभागीय कार्रवाई का डर खत्म होगा। इससे कर प्रणाली के प्रति व्यापारियों में विश्वास बढ़ेगा। क्रिमिनल मामलों के प्रावधानों को सीमित करने से अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ कम होगा। इस मौके पर सीए शिशिर शुक्ला, पूजा श्रीवास्तव, शैलेश शर्मा, छवि जैन, ऋतु, संजय अग्रवाल, राजेश कनोडिया, दीप कुमार मिश्र, पराग टंडन, शुभम ओमर, संकल्प भल्ला, राजीव कुमार गुप्ता, विशाल खन्ना, प्रशांत रस्तोगी, शरद सिंघल, अवधेश मिश्र आदि थे।

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