राधा अष्टमी पर इस्कॉन मंदिर में आयोजित उत्सव राधा कृष्ण मय हो गया। श्री श्री राधा माधव की रत्न जड़ित पोशाक, सुगंधित पुष्पों एवं विशेष अलंकारों से सुसज्जित स्थल पर आरती की गई। इस युगल स्वरूप को देखकर श्रद्धालु आह्लादित हो उठे। मंगला आरती के साथ ही उत्सव का प्रारंभ हुआ। इसके बाद राधारानी के कृष्ण प्रेम की भक्तों को कथा सुनाई गई। उत्सव में वैष्णव आचार्यों की रचित सुंदर स्तुतियों का गान किया गया। इस्कॉन गोवर्धन इको विलेज मुंबई से आए दामोदर प्रभु ने राधा-रानी के गोपनीय तत्व पर विशेष कथा की। उन्होंने बताया कि राधा रानी आदिशक्ति हैं। वह भगवान कृष्ण की आनंद प्रदायिनी शक्ति एवं उनकी नित्य संगिनी हैं। उनकी कृपा से श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। राधा रानी की किसी सामान्य स्त्री से तुलना नहीं की जा सकती। जिस प्रकार से सूर्य एवं सूर्य की किरण कभी पृथक नहीं होते इसी प्रकार से पूर्ण शक्तिमान भगवान श्री कृष्ण अपनी शक्ति राधा रानी से कभी पृथक नहीं होते हैं। सुबह 11 बजे से 108 चांदी के कलशों से दिव्य महाभिषेक प्रारंभ हुआ। राधे जय, जय माधव दयिते, राधा रानी की जय, महारानी की जय इत्यादि वैष्णव गीतों से मंदिर प्रांगण राधा रानी की भक्ति में संगीतमय हो उठा। भगवान के गर्भ ग्रह को सुगंधित पुष्पों एवं फलों से इस प्रकार सुसज्जित किया गया मानो वृंदावन का निकुंज हो। दोपहर एक बजे भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया गया जिसके साथ सभी ने अपने व्रत का पारण किया। शाम चार बजे श्री श्री राधा माधव के दर्शन कपाट खुलेष इसके साथ ही कीर्तन प्रारंभ हो गया। इसके बाद विशेष पालकी महोत्सव आकर्षण का केंद्र बना। मैकेनिकल हाथी के ऊपर श्री भगवान के उत्सव विग्रहों सहित भक्त विराजमान हुए। लोगों ने कलश यात्रा में भाग लिया गया। मृदंग एवं शंख की ध्वनि के साथ शोभा यात्रा प्रारंभ हुई। हरे कृष्ण महामंत्र के कीर्तन से राधा रानी से प्रार्थना की गई। इस्कॉन जुड़े नन्हे बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।