गाजीपुर जिले के मुहम्मदाबाद के श्री रामलीला समिति द्वारा रविवार को रामलीला का प्रारंभ मुकुटपूजा के बाद नारद मोह का मंचन करके हुआ। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि रामलीला की शुरुआत देवर्षि नारद की कठोर तप से हुई। नारद मुनि की तपस्या से देवराज इंद्र का सिंहासन डोल उठा। भयभीत इंद्र ने उनकी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव और सुंदर अप्सराओं को हिमालय पर्वत पर भेजा। हालांकि, कामदेव के तमाम यत्न और मायावी प्रयास नारद की अखंड तपस्या के आगे निष्फल साबित हुए। उन्होंने बताया कि पराजित होकर कामदेव ने देवर्षि से क्षमा मांगी और स्वर्ग लौट गए। इस विजय के बाद नारद मुनि के मन में अहंकार जाग उठा कि उन्होंने काम पर विजय प्राप्त कर ली हैं। कामजीत होने का गर्व लिए नारद मुनि तीनों लोकों में पहुंचे। पहले देवाधिदेव महादेव और फिर ब्रह्मा जी के समक्ष उन्होंने अपनी विजय का बखान किया। शिव और ब्रह्मा दोनों ने ही उन्हें चेतावनी दी कि वे इस बात की चर्चा बैकुंठ में भगवान विष्णु से कदापि न करें, लेकिन अहंकार के वशीभूत नारद नहीं माने और सीधे भगवान नारायण के पास पहुंच गए तथा अपनी काम-विजय की गाथा गाकर सुनाई। नारद के इस अभिमान को दूर करने के लिए भगवान विष्णु मंद-मंद मुस्कुराए और उन्होंने अपनी माया से एक अलौकिक नगर रचा। माया के उस नगर के राजा शीलनिधि ने अपनी रूपवती पुत्री विश्वमोहिनी के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया।