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ईश्वर और जनता के बीच सेतु होता है पुरोहित: महाधर्माध्यक्ष डॉ. राफी मंजलि

आगरा महाधर्मप्रांत और समस्त ईसाई समाज के लिए रविवार का दिन विशेष हर्ष, उल्लास एवं ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का अवसर रहा। वजीरपुरा मार्ग स्थित ऐतिहासिक निष्कलंक माता महागिरजाघर में आयोजित भव्य धार्मिक समारोह में आगरा के महाधर्माध्यक्ष डॉ. राफी मंजलि ने चार उपयाजकों को पुरोहित पद पर अभिषिक्त किया। पुरोहिताभिषेक प्राप्त करने वालों में डीकन स्वप्निल संजव दाबरे, डीकन सुमन टोपनो, डीकन जीवन प्रकाश मचाडो और डीकन सतीश केरकेट्टा शामिल हैं। इस पावन अवसर पर महागिरजाघर को भव्य रूप से सजाया गया था। पुरोहिताभिषेक समारोह में आगरा महाधर्मप्रांत के सोलह जिलों के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पुरोहितों, धर्मसमाज की धर्मबहनों, विश्वासियों तथा नवाभिषिक्त पुरोहितों के परिजनों ने भाग लिया। पूरा गिरजाघर प्रार्थना, भक्ति, आध्यात्मिक उल्लास और ईश्वर के प्रति धन्यवाद की भावना से परिपूर्ण दिखाई दिया। समारोह के दौरान अपने प्रभावशाली प्रवचन में महाधर्माध्यक्ष डॉ. राफी मंजलि ने पुरोहित के आध्यात्मिक जीवन, दायित्वों और समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुरोहित ईश्वर और सामान्य जनता के बीच एक सेतु की भांति होता है। उसका प्रमुख दायित्व ईश्वर के वचन की घोषणा करना, पवित्र धार्मिक अनुष्ठानों को सम्पन्न कराना, प्रार्थना एवं संस्कारों के माध्यम से विश्वासियों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना तथा उन्हें ईश्वर के और निकट लाना है। महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि पुरोहित केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह लोगों के सुख-दुःख में सहभागी बनकर उन्हें सांत्वना, आशा और मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। रोगियों की सेवा करना, दुःखी एवं निराश लोगों को सहारा देना, पापों की क्षमा के लिए ईश्वर की दया का संदेश देना और समाज में प्रेम, शांति तथा भाईचारे की भावना को मजबूत करना भी उसके महत्वपूर्ण दायित्व हैं। चारों नवाभिषिक्त पुरोहितों को संबोधित करते हुए महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में पुरोहितों की जिम्मेदारियां और भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। उन्हें अपने जीवन, आचरण, विनम्रता और मधुर व्यवहार के माध्यम से प्रभु ईसा मसीह की शिक्षाओं को साकार करना चाहिए। नव पुरोहित अपने जीवन को ईश्वर और मानवता की सेवा के लिए समर्पित करें तथा प्रत्येक व्यक्ति के प्रति करुणा, प्रेम और सम्मान का भाव रखें। उन्होंने कहा कि पुरोहित का जीवन त्याग, समर्पण, आज्ञापालन और सेवा का जीवन है। उसे अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर ईश्वर की इच्छा के अनुसार कार्य करना चाहिए तथा समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रेम, दया और ईश्वरीय करुणा का संदेश पहुंचाना चाहिए। समारोह में एक अत्यंत भावुक क्षण तब आया, जब चारों उम्मीदवारों के माता-पिता एवं परिजनों ने उन्हें महाधर्माध्यक्ष को समर्पित किया। इसके बाद महाधर्माध्यक्ष ने उम्मीदवारों की स्वेच्छा और पुरोहित पद के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के संबंध में सहमति प्राप्त की। पुरोहिताभिषेक की परंपरागत विधि के अनुसार चारों उम्मीदवारों ने आजीवन ब्रह्मचर्य एवं आज्ञापालन सहित पुरोहित जीवन से संबंधित प्रतिज्ञाएं ग्रहण कीं। इसके पश्चात महाधर्माध्यक्ष ने उनके सिर पर हाथ रखकर पवित्र अभिषेक की विधि सम्पन्न की। उपस्थित पुरोहितों ने भी परंपरा के अनुसार नवाभिषिक्त पुरोहितों के सिर पर हाथ रखकर उनके लिए प्रार्थना की। इसके बाद पवित्र तेल से अभिषेक और पुरोहित पद के प्रतीक पवित्र वस्त्र धारण कराने की विधियां सम्पन्न की गईं। यह अवसर चारों नव पुरोहितों के जीवन का एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पड़ाव रहा, क्योंकि अब वे कलीसिया की सेवा, विश्वासियों के आध्यात्मिक मार्गदर्शन और प्रभु ईसा मसीह के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए औपचारिक रूप से पुरोहित सेवा में प्रवेश कर चुके हैं। इस अवसर पर क्रिश्चियन समाज सेवा सोसाइटी के अध्यक्ष श्री डेनिस सिल्वेरा ने चारों नवाभिषिक्त पुरोहितों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह समारोह आगरा महाधर्मप्रांत के साथ-साथ समस्त ईसाई समाज के लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है।

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