राजधानी शिमला में बंदरों और आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर शिमला नागरिक सभा ने डीसी ऑफिस के बाहर धरना दिया। इस दौरान सभा के सदस्यों ने प्रशासन से बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शहर के कई क्षेत्रों में बंदरों और आवारा कुत्तों की मौजूदगी के कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बंदरों के कारण लोगों को घरों और दुकानों में सामान सुरक्षित रखना पड़ता है, जबकि आवारा कुत्तों के झुंड से राहगीरों, बच्चों और बुजुर्गों में भय बना रहता है। शिमला नागरिक सभा ने मांग की कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करे। बंदरों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण, प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता जताई गई। सभा ने कहा कि समस्या का समाधान केवल औपचारिक बैठकों और आश्वासनों से नहीं होगा। इसके लिए नियमित कार्रवाई, जिम्मेदारी तय करने और शिकायतों पर समयबद्ध प्रतिक्रिया की व्यवस्था जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से शहर के संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष अभियान चलाने की मांग भी रखी। धरने के माध्यम से नागरिक सभा ने लोगों की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे को प्रशासन के सामने प्रमुखता से उठाया। सभा का कहना है कि राजधानी में रहने वाले लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या पर जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जा सकता है।