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झालावाड़: हाथ में लट्ठ, यूपीएससी का सपना और अब शहर की कमान! 22 साल की याशिका बनीं अकलेरा नगरपालिका अध्यक्ष

Wed, 23 Sep 2026 09:23 AM IST
झालावाड़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़

हाथ में लट्ठ, दिमाग में यूपीएससी की तैयारी और अब कंधों पर नगर पालिका की जिम्मेदारी—यह पहचान है अकलेरा की नई अध्यक्ष याशिका मेवाड़ा की। 22 वर्षीय याशिका ने वार्ड 25 से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता और अब अकलेरा नगर पालिका की अध्यक्ष चुनी गई हैं। अध्यक्ष पद के चुनाव में उन्हें 35 में से 25 मत मिले और उन्होंने कांग्रेस की हिमानी पारेता को 17 मतों के अंतर से हराया। स्थानीय स्तर पर परिजनों और समर्थकों की ओर से याशिका को हाड़ौती की सबसे कम उम्र की नगरपालिका अध्यक्ष बताया जा रहा है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। याशिका संघ की पृष्ठभूमि से जुड़ी रही हैं और दंड यानी लट्ठ संचालन में प्रशिक्षित हैं। महिला शक्ति से जुड़े कार्यक्रमों में वह लट्ठ संचालन का प्रदर्शन भी कर चुकी हैं। दिल्ली में रहकर चार साल से यूपीएससी की तैयारी याशिका मेवाड़ा ने झालावाड़ कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह करीब चार वर्षों से दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही थीं। पढ़ाई के साथ वह सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रही हैं।
परिवार के अनुसार, बचपन से ही उनका संघ से जुड़ाव रहा है और उन्होंने संघ के प्रशिक्षण के द्वितीय वर्ष तक प्रशिक्षण लिया है। याशिका को घोष वादन और लट्ठ यानी दंड संचालन का प्रशिक्षण भी प्राप्त है। महिला शक्ति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में वह लट्ठ संचालन का प्रदर्शन कर चुकी हैं। इसके अलावा आत्मरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण में अचानक होने वाले हमले से बचाव के दांव-पेंच भी उन्होंने सीखे हैं। लंबे समय से भाजपा से जुड़ा है परिवार याशिका का परिवार लंबे समय से भाजपा से जुड़ा हुआ है। उनके दादा बीरमचंद मेवाड़ा वर्ष 1989 में भाजपा से चुनाव लड़ चुके हैं। उनके पिता राजमल पारेता भाजपा कार्यकर्ता हैं और इससे पहले वह संघ से जुड़े रहे हैं। उनके चाचा संदीप पारेता भी संघ से जुड़े हैं, जबकि चाची आकांक्षा पारेता भाजपा से पार्षद रह चुकी हैं।
परिवार का कहना है कि राजनीतिक और सामाजिक माहौल के बीच पली-बढ़ी याशिका की बचपन से ही सामाजिक कार्यों में रुचि रही है। इसी माहौल ने उन्हें राजनीति और सामाजिक गतिविधियों से जोड़े रखा। मां की जगह बेटी ने संभाला चुनावी मोर्चा परिजनों के अनुसार, शुरुआत में याशिका की मां के चुनाव लड़ने पर सहमति बनी थी, लेकिन आवश्यक दस्तावेज समय पर तैयार नहीं हो पाने के कारण परिवार ने विकल्प के तौर पर दिल्ली में रह रही याशिका से संपर्क किया। शुरुआत में याशिका ने यूपीएससी की तैयारी का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने से इनकार किया था। हालांकि, परिवार के आग्रह और पिता की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसके बाद वह दिल्ली से अकलेरा पहुंचीं और वार्ड 25 से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं। वार्ड 25 के आधिकारिक परिणाम के अनुसार याशिका ने 81 वोट हासिल कर 40 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। अकलेरा नगर पालिका में भाजपा ने 35 में से 25 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस को आठ और निर्दलीय उम्मीदवारों को दो वार्ड में जीत मिली। अध्यक्ष पद के चुनाव में याशिका को 25 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की हिमानी पारेता को आठ और निर्दलीय आमिला मंसूरी को दो वोट मिले। यूपीएससी की तैयारी के साथ अब नगर पालिका की जिम्मेदारी याशिका के सामने अब एक ओर यूपीएससी की तैयारी जारी रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर अकलेरा नगर पालिका की अध्यक्ष के रूप में शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं की जिम्मेदारी भी होगी। युवा उम्र में मिली इस जिम्मेदारी के चलते उनकी भूमिका पर अकलेरा की राजनीतिक और सामाजिक नजरें टिकी हैं। पिछले कार्यकाल में भी नगर पालिका बोर्ड भाजपा के पास रहा था। वहीं, मनोहरथाना विधायक गोविंद रानीपुरिया भी इसी क्षेत्र से हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि नगर पालिका को प्रदेश सरकार से सहयोग मिल सकता है। हालांकि, विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों का वास्तविक असर आने वाले समय में सामने आएगा। लट्ठ और घोष वादन में भी दिखा चुकी हैं हुनर याशिका मेवाड़ा लट्ठ और घोष वादन का प्रदर्शन भी कर चुकी हैं। उनसे जुड़ी तस्वीरों में वह लट्ठ संचालन और घोष वादन करते हुए नजर आती हैं। अब तक उनकी पहचान यूपीएससी की तैयारी कर रही युवा छात्रा और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी युवती के तौर पर रही है, लेकिन अकलेरा नगर पालिका की अध्यक्ष बनने के बाद उनके सामने स्थानीय निकाय के संचालन की नई जिम्मेदारी आ गई है।

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