मंडी गोबिंदगढ़, 31 अगस्त (लखवीर सिंह लक्की): श्री अकाल तख्त साहिब से आरंभ हुआ मीऱी-पीरी खालसा मार्च विभिन्न पड़ावों से होता हुआ मंडी गोबिंदगढ़ पहुंचा। यहां संगत, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और शिरोमणि अकाली दल हलका अमलोह के मुख्य सेवादार गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना तथा एसजीपीसी सदस्य रविंदर सिंह खालसा के नेतृत्व में मीऱी-पीरी खालसा मार्च का भव्य स्वागत किया गया। शहर के मुख्य चौक को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया और पालकी साहिब पर संगत द्वारा फूलों की वर्षा की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु साहिब के पवित्र शस्त्रों के नजदीक से दर्शन किए। इस अवसर पर संगत को संबोधित करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंथक एकता को मजबूत करने, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को अपना सहारा बनाने, नौजवानों को नशों से बचाने तथा पंजाब छोड़कर विदेश जाने की बजाय अपनी धरती से जुड़े रहने का आह्वान किया। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि मंडी गोबिंदगढ़ की यह धरती ऐतिहासिक है, जहां छठे पातशाह श्री गुरु हरिगोबिंद साहिब जी के चरण पड़े हैं। मीऱी-पीरी खालसा मार्च का उद्देश्य कलगीधर पातशाह के पवित्र संदेश ‘सभ सिखन को हुकम है गुरु मानिओ ग्रंथ’ को याद करवाना और संगत को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सिख कौम ने अपने इतिहास में बहुत कठिन समय देखे हैं। घल्लूघारों के दौरान हजारों सिखों ने शहादतें दीं, लेकिन गुरु साहिब की कृपा से सिख कौम ने कभी हौसला नहीं छोड़ा। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हमेशा सिख कौम का सबसे बड़ा सहारा रहे हैं। उन्होंने संगत से अपील की कि सुख हो या दुख, हर समय गुरु साहिब के समक्ष अरदास करनी चाहिए और देहधारी गुरु से सावधान रहना चाहिए। पंजाब हमारा घर, जमीनें बेचकर छोड़ना घाटे का सौदा जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि पंजाब हमारा घर है। अपनी जमीनें बेचकर पंजाब छोड़ देना घाटे का सौदा है। यह शहीदों की धरती है, जहां गुरु साहिबान के चरण पड़े और अनेकों शहीदों ने अपना खून बहाया। इसलिए पंजाब को छोड़ने की बजाय इसे बचाने, बसाने और खुशहाल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पंजाब की घटती आबादी भी चिंता का विषय है। पंजाबी चाहे सिख हो या हिंदू, सभी को पंजाब की तरक्की के लिए अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में यह रुझान बढ़ रहा है कि एक भुजंगी के जन्म के बाद लोग दूसरा बच्चा पैदा ही नहीं करते। यदि परिवार में पहले लड़का पैदा हो जाए तो कई लोग दूसरा बच्चा पैदा करने के बारे में सोचते तक नहीं। जबकि परिवार, समाज तथा आने वाली पीढ़ियों और नस्लों को जीवित रखने के लिए लड़का और लड़की दोनों का होना जरूरी है। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि लड़का परिवार की वंश परंपरा को आगे बढ़ाता है, वहीं लड़की भी परिवार और समाज की उतनी ही महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि बेटियों का सम्मान करना गुरु साहिब ने सिखाया है। श्री गुरु नानक देव जी के पावन शब्द ‘सो किउ मंदा आखिए, जितु जम्महि राजान’ का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बेटियों को किसी भी तरह कम नहीं समझना चाहिए। बेटियों की कोख से ही राजा-महाराजा और महापुरुष जन्म लेते हैं। समाज को बेटियों और बेटों को बराबर प्यार, सम्मान और अवसर देने चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन में महिला की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण होती है और परिवार के भविष्य से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने की जरूरत है। एक बच्चे तक सीमित रहने की सोच पर भी समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। नशा बंद नहीं हुआ, नौजवानों को बचाने के लिए समाज को आगे आना होगा जत्थेदार गड़गज्ज ने पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गांव-गांव में नशा नौजवान पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है। कई परिवारों के नौजवान नशों की भेंट चढ़ चुके हैं और मासूम बच्चे अपने माता-पिता से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़े अफसोस की बात है कि सरकार अपना समय गुजार रही है, लेकिन नशा खत्म नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि नशा बेचने वालों का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए। नशों के खात्मे के लिए सरकार के साथ-साथ समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। नौजवानों को गुरबाणी, गुरसिखी और खेलों से जोड़कर नशों से दूर रखने की जरूरत है। उन्होंने गुरु घर की परंपराओं से जुड़े रहने की अपील करते हुए कहा कि गुरु घर की गोलक और संगत की सेवा हमारी पुरातन परंपरा का हिस्सा है। लोगों को गुरु घर और पंथ की परंपराओं के खिलाफ भ्रम पैदा करने वाले लोगों से सावधान रहना चाहिए। इस अवसर पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य भाई रविंदर सिंह खालसा तथा नौजवान भाई गुरप्रीत सिंह सहित मार्च की सफलता के लिए योगदान देने वाले सेवादारों का धन्यवाद किया गया। समूचे क्षेत्र की चढ़दी कला के लिए अरदास की गई और पंजाब के हंसते-बसते रहने, बेटियों और बेटों की तरक्की तथा नौजवानों को नशों से दूर रखने की कामना की गई। बॉक्स पंजाब की नौजवान पीढ़ी को नशों से बचाना सबसे बड़ी जरूरत : हरजिंदर सिंह धामी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने मीऱी-पीरी खालसा मार्च के दौरान संगत को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब गुरु साहिबान की धरती है और इस धरती पर नशों का बढ़ता रुझान बेहद चिंताजनक है। पंजाब की नौजवान पीढ़ी को नशों से बचाने के लिए समाज के हर वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि जिन सरकारों ने नशा थोड़े समय में खत्म करने के दावे किए थे, आज वे खुद मान रही हैं कि नशों की समस्या गंभीर बनी हुई है। कई गांवों में नशों के कारण नौजवान अपनी जान गंवा चुके हैं और मासूम बच्चे अपने माता-पिता से वंचित हो रहे हैं। यह पंजाब के लिए बहुत बड़ी त्रासदी है। धामी ने कहा कि नशों के खात्मे के लिए नौजवानों को गुरु साहिब की शिक्षाओं से जोड़ना और गुरसिखी जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। उन्होंने मीऱी-पीरी के सिद्धांत को याद करवाते हुए कहा कि श्री गुरु हरिगोबिंद साहिब जी द्वारा दिया गया यह सिद्धांत आज भी समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने मीऱी-पीरी खालसा मार्च में बड़ी संख्या में शामिल हुई संगत, विशेष रूप से माताओं, बहनों और बीबियों का धन्यवाद किया। उन्होंने नौजवान सेवादारों की सराहना करते हुए कहा कि सेवा भावना से कार्य करने वाले नौजवानों को प्रोत्साहित करना समाज की जिम्मेदारी है। धामी ने कहा कि इस मार्च के माध्यम से संगत को गुरु साहिबान के सिद्धांतों से जोड़ने तथा पंजाब की नौजवान पीढ़ी को नशों सहित अन्य सामाजिक बुराइयों से बचाने का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने समूची संगत के लिए गुरसिखी और नाम की दात की अरदास की।