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एमपी: डिंडौरी में अधूरे पंचायत भवन पर 33 लाख का भुगतान, कलेक्टर नाराज; सचिव पर गिरी गाज

Sat, 24 Oct 2026 01:57 PM IST
डिंडोरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डिंडोरी

डिंडौरी जिले की ग्राम पंचायत गनेशपुर में पंचायत भवन निर्माण के लिए स्वीकृत सरकारी राशि के भुगतान और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जनपद पंचायत डिंडौरी के अंतर्गत आने वाली इस पंचायत में भवन निर्माण के लिए 37 लाख 50 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे। आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही करीब 33 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। भवन अधूरा होने और निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले में पंचायत सचिव को निलंबित करने, सरपंच के खिलाफ कार्रवाई करने और निकाली गई राशि जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, भुगतान की प्रक्रिया और निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

अधूरे निर्माण के बावजूद लाखों का भुगतान
ग्राम पंचायत गनेशपुर में पंचायत भवन निर्माण के लिए 37.50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य के लिए करीब 33 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि भवन का निर्माण अधूरा बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि निर्माण की मौजूदा स्थिति के आधार पर भुगतान कैसे किया गया और राशि जारी करने से पहले कार्य की गुणवत्ता का सत्यापन हुआ था या नहीं।

पढे़ं: चेन्नई से लौटकर फिर जाने की फिराक में था राहुल, जबलपुर स्टेशन से दबोचा; ज्वेलर्स डकैती कांड का पर्दाफाश निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने भवन की गुणवत्ता पर नाराजगी जताई। इसके बाद पंचायत सचिव को निलंबित करने और सरपंच के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। अब जांच में भुगतान से जुड़े अभिलेखों, निर्माण की प्रगति और तकनीकी मूल्यांकन से संबंधित तथ्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

सरपंच ने उपयंत्री पर लगाए गंभीर आरोप
इस मामले में सरपंच ने उपयंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। सरपंच का आरोप है कि उपयंत्री ठेकेदार को भुगतान कराने के लिए उन पर दबाव बनाते थे और डराते-धमकाते थे। इन आरोपों के बाद तकनीकी निगरानी और भुगतान की अनुशंसा करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच का मुद्दा भी सामने आया है। हालांकि, उपयंत्री पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह जांचना जरूरी है कि निर्माण कार्य का मूल्यांकन किसने किया, भुगतान की अनुशंसा किस स्तर पर की गई और पूरी प्रक्रिया में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही।

पूर्व सचिव के कार्यकाल में हुआ भुगतान
जानकारी के मुताबिक, करीब दो महीने पहले पंचायत सचिव का तबादला होने के बाद रोजगार सहायक को पंचायत का प्रभार सौंपा गया था। वहीं, पूर्व सचिव कन्हैया यादव के कार्यकाल में ठेकेदार को करीब 28 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में भुगतान की तारीखों, संबंधित दस्तावेजों और निर्माण कार्य की प्रगति का मिलान करना जरूरी है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस अवधि में कितनी राशि जारी की गई और भुगतान की प्रक्रिया में किन लोगों की जिम्मेदारी थी।

जांच के दायरे में आ सकते हैं अन्य जिम्मेदार
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत भवन अधूरा होने और निर्माण की गुणवत्ता पर आपत्ति के बावजूद लाखों रुपये का भुगतान किस आधार पर किया गया। क्या कार्रवाई पंचायत सचिव और सरपंच तक सीमित रहेगी या निर्माण की निगरानी करने वाले उपयंत्री तथा भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी? फिलहाल कलेक्टर के निर्देशों के बाद आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण है। जांच से ही स्पष्ट होगा कि सरकारी राशि के उपयोग में कहां चूक हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं।

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