हरोली विधानसभा क्षेत्र में नशे के बढ़ते कारोबार और दो युवकों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर सियासत गरमा गई है। भाजपा नेता प्रो. राम कुमार ने प्रदेश सरकार पर नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। ऊना में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि हरोली में चिट्टे का नेटवर्क लगातार फैल रहा है और इसका सीधा असर युवाओं तथा उनके परिवारों पर पड़ रहा है। प्रो. राम कुमार ने दावा किया कि हरोली विधानसभा क्षेत्र के लगभग हर गांव में नशे की समस्या पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि कई परिवार अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनके अनुसार, नशे की वजह से युवाओं की जिंदगी प्रभावित हो रही है और कुछ मामलों में मौतें भी सामने आ रही हैं। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा लंबे समय से चिट्टे और नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाती रही है, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते नशा तस्करी के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाते तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हरोली में नशे की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता है, लेकिन सरकार और क्षेत्रीय नेतृत्व की ओर से अपेक्षित गंभीरता नजर नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने से नशे की समस्या खत्म नहीं होगी। इसके लिए नशा तस्करों और उनके नेटवर्क पर सीधे कार्रवाई जरूरी है। प्रो. राम कुमार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रदेश में चिट्टा माफिया फिर सक्रिय हुआ है। उन्होंने सरकार से पुलिस को स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने देने और नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। भाजपा नेता ने कहा कि हरोली में चिट्टे के खिलाफ जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि 5 सितंबर से हरोली क्षेत्र में नशे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य सरकार और प्रशासन का ध्यान क्षेत्र में बढ़ती नशे की समस्या की ओर आकर्षित करना है। प्रो. राम कुमार ने हरोली में सरकारी नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को सिर्फ अपराधी के तौर पर देखने के बजाय उनके उपचार और पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। परिवारों को इलाज और पुनर्वास की बेहतर सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिलनी चाहिए।