आदिमानव के संकेतों और गुफा चित्रों से शुरू हुई संचार की यात्रा आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तक पहुंच चुकी है। संचार के इस बदलाव ने न केवल मनुष्य के जीवन को आसान बनाया, बल्कि शिक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रशासन और पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों में भी बड़े परिवर्तन किए हैं। इसी विषय को समझने के लिए वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से “सोसाइटी इन इन्फॉर्मेशन एज : आदिमानव से आधुनिक मानव तक विकास यात्रा एवं संचार विकास” विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष फ्लाइंग ऑफिसर डॉ. चमन ने की। उन्होंने कहा कि आदिमानव से आधुनिक मानव तक की विकास यात्रा संचार के निरंतर विकास की यात्रा भी है। प्रारंभिक मानव संकेतों, हाव-भाव, ध्वनियों और गुफा चित्रों के माध्यम से अपनी बात दूसरों तक पहुंचाता था। उस समय संचार के साधन सीमित थे, लेकिन मनुष्य की जरूरतों और सामाजिक विकास के साथ संचार के तरीके भी बदलते गए। डॉ. चमन ने बताया कि समय के साथ भाषा और लेखन का विकास हुआ। इसके बाद मुद्रण, रेडियो और टेलीविजन जैसे माध्यमों ने सूचना को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का काम किया। आज इंटरनेट, सोशल मीडिया, डिजिटल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने संचार की गति और पहुंच को और व्यापक बना दिया है। उन्होंने कहा कि सूचना युग में सूचना महत्वपूर्ण संसाधन और शक्ति बन चुकी है। डिजिटल तकनीक ने शिक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रशासन और पत्रकारिता समेत जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित किया है। अब सूचनाओं का आदान-प्रदान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और व्यापक हो गया है। विद्यार्थियों के लिए भी डिजिटल माध्यम सीखने, संवाद करने और नए अवसर तलाशने का महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं। संगोष्ठी में डिजिटल तकनीक के सकारात्मक प्रभावों के साथ उससे जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। डॉ. चमन ने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फेक न्यूज, साइबर अपराध, डिजिटल असमानता, निजता और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दे गंभीर हो रहे हैं। ऐसे में सूचना का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ करना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और जनसंचार के विद्यार्थियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि उनके माध्यम से समाज तक पहुंचने वाली सूचनाएं लोगों की सोच और निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं। संगोष्ठी के दौरान मानव विकास एवं संचार की यात्रा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को संचार के विभिन्न चरणों और आधुनिक तकनीक तक पहुंचने की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने भी विषय पर अपने विचार रखे और संचार के बदलते स्वरूप पर चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ. संजीव कुमार ने संगोष्ठी के आयोजन के लिए पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन और विषय की व्यावहारिक समझ विकसित करने में सहायक होते हैं।