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पानीपत में बैंक हड़ताल का असर, 280 शाखाएं बंद; 100 करोड़ का कारोबार ठप

पानीपत। सप्ताह में पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली लागू करने सहित कई लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के आह्वान पर बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल का पानीपत जिले में व्यापक असर देखने को मिला। जिले की सभी 280 बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे और कामकाज पूरी तरह ठप रहा। हड़ताल के कारण जिले भर के 2,500 से अधिक बैंक अधिकारी व कर्मचारी काम छोड़ विरोध में उतरे। इससे एक ही दिन में करीब 100 करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन और कारोबारी गतिविधियां सीधे तौर पर प्रभावित हुईं। एसबीआई जीटी रोड शाखा के समक्ष एकत्रित होकर बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने केंद्र सरकार और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन को एसबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के क्षेत्रीय सचिव नरेंद्र देशवाल, पीएनबी से प्रियंका भारद्वाज, कैनरा बैंक से डिंपल, सुमित झा, प्रद्यूमन, विनीत भारद्वाज, रविकांत शर्मा और अनिल कुमार सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। काम न होने से हलकान रहे ग्राहक हड़ताल की पूर्व सूचना न होने और शुक्रवार के बाद शनिवार व रविवार का साप्ताहिक अवकाश होने के कारण बैंकों में पहुंचे आम ग्राहकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बैंक शाखाओं के मुख्य द्वार बंद मिलने से चेक क्लीयरेंस, नकद जमा-निकासी, केवाईसी और पासबुक अपडेट कराने आए लोग निराश लौटते दिखे। बैंक पहुंचे मॉडल टाउन निवासी सुमित छाबड़ा ने बताया कि उन्हें व्यापारिक लेन-देन के लिए चेक जमा कराना था, लेकिन मुख्य गेट पर ताला लगा मिला। अब तीन दिन तक काम रुका रहेगा। वहीं, समालखा से आई बुजुर्ग महिला शांति देवी ने बताया कि वे पेंशन के रुपये निकालने आई थीं, लेकिन बैंक बंद होने से उन्हें बिना काम कराए ही खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है। मार्च 2024 से अटका है पांच दिवसीय बैंकिंग का समझौता यूनियन नेता प्रियंका भारद्वाज ने कहा कि मार्च 2024 में आईबीए के साथ 5 दिवसीय कार्य सप्ताह को लेकर समझौता हो चुका था, जिसे ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी लागू नहीं किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि जब केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, एलआईसी और आरबीआई में 5 दिवसीय सप्ताह लागू है तो बैंकों में क्यों नहीं? कर्मचारियों ने इसके बदले प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने का प्रस्ताव भी दिया है। इसके अलावा भेदभावपूर्ण परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) व्यवस्था की समीक्षा, पेंशन व स्वास्थ्य बीमा में सुधार की मांग उठाई गई। मांगे न मानने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी बैंक नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार और आईबीए ने जल्द वार्ता कर समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। यूनियनों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय हड़ताल की जाएगी, जबकि 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा।

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