झज्जर। बहादुरगढ़ रोड पर स्थित प्राचीन रामलीला मैदान में चल रही दिन की रामलीला में मुकुट वाले हनुमान विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। दिन की रामलीला में जैसे ही ढोल नगाड़ों के साथ मुकुट वाले हनुमान पहुंचे दर्शकों का उत्साह भी दोगुना दिखाई दिया। पिछले कई वर्षों से बेरी गेट, शिव मंदिर, बूढा महादेव मंदिर, मढ़ी माता मंदिर, प्राचीन खाटू श्याम मंदिर, मेन बाजार स्थित हनुमान मंदिर व बाबा कांशीगिरि मंदिर की तरफ से मुकुट वाले हनुमानजी की पैदल यात्रा निकली जाती है। मनीष मेहता ने बताया कि मंदिर बाबा कांशीगिरि से जितेंद्र महाराज, हेमंत महाराज, मनोहर महाराज, गुरुप्रीत महाराज, सक्षम महाराज, आरव महाराज, पारस महाराज, मयंक महाराज, श्रीकांत महाराज, सुनील महाराज, अमन महाराज सहित इस विशेष मुकुट को धारण कर प्राचीन श्री रामलीला कमेटी मंचन पर पहुंचकर प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद लिया। यह भक्ति की शक्ति है कि भक्त 6 फुट लंंबे और 20 किलो से ज्यादा इस मुकुट को धारण कर आसानी से पैदल यात्रा कर लेते हैं। मान्यता है कि भक्त पर बजरंगबली कि कृपा होती है, वही बजरंगी बनता है। मुकुट वाले हनुमानजी के प्रति श्रद्धालुओं की इतनी आस्था है कि लोग मुकुट वाले हनुमान के स्वरूपों को अपने घरों में आने का निमंत्रण देते हैं। भक्त बड़े श्रद्धा भाव से मुकुट वाले हनुमानजी का आदर सत्कार करके अपने आपको पुण्य का भागी मानते हैं। दशहरे के दिन जलेबी खाने की परंपरा सदियों से चली आ रही हैं। कथानुसार भगवान श्री ने जलेबी खाकर रावण पर अपनी जीत का जश्न मनाया था। तब से दशहरे के दिन जलेबी खाने की परंपरा शुरू हुई। इस अवसर पर मंदिर समिति के प्रधान सुधांशु हंस, महासचिव देवराज भूगड़ा, राघव-योगेश रंजन, मनीष मेहता, वर्मासुभाष, भारत भूषण नंदा, मोक्ष-राजेंद्र वधवा, शिवम तनेजा, लोकेश वर्मा, तरुण सतीश वर्मा मौजूद रहे।