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Brazil: ब्राजील के उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला, पहली बार किसी को लैंगिक तौर पर तटस्थ घोषित किया
Thu, 08 May 2025 08:58 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रियो डी जेनेरियो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रियो डी जेनेरियो
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 08 May 2025 08:58 AM IST
सार
पैनल में शामिल जजों ने भी इस मामले को नाटकीय बताया, लेकिन ये भी माना कि याचिकाकर्ता को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाकी जज भी इस बात से सहमत हुए।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
ब्राजील के एक उच्च न्यायालय ने एतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक व्यक्ति को लैंगिक तौर पर तटस्थ घोषित किया है। मतलब न उसे पुरुष माना जाएगा और न ही महिला। हालांकि उच्च न्यायालय के इस फैसले की समीक्षा हो सकती है। यह फैसला ब्राजील के ब्रासीलिया के सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस ने बुधवार को सुनाया।
क्या है पूरा मामला
जिस व्यक्ति ने यह मांग की थी, वह अपने जन्म प्रमाण पत्र पर लिंग तटस्थ पदनाम चाहता था। याचिका दायर करने वाला व्यक्ति पहले महिला था, लेकिन लिंग परिवर्तन कराकर वह पुरुष बन गया। ऐसे में पहले उसने खुद को पुरुष के रूप में वर्णित करने की मांग की, लेकिन कुछ साय बाद उसे पछतावा हुआ तो उसने अदालत से अपील की कि उसे लैंगिक तौर पर तटस्थ घोषित किया जाए। पैनल में शामिल जजों ने भी इस मामले को नाटकीय बताया, लेकिन ये भी माना कि याचिकाकर्ता को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाकी जज भी इस बात से सहमत हुए। फिलहाल ब्राजील की उच्च न्यायालय ने इस मामले को सील कर दिया है। इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
ये भी पढ़ें- New Pope: सिस्टिन चैपल की चिमनी से निकलता दिखा काला धुआं; पहले कॉन्क्लेव वोट में नहीं हुआ पोप का चुनाव
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क्या है पूरा मामला
जिस व्यक्ति ने यह मांग की थी, वह अपने जन्म प्रमाण पत्र पर लिंग तटस्थ पदनाम चाहता था। याचिका दायर करने वाला व्यक्ति पहले महिला था, लेकिन लिंग परिवर्तन कराकर वह पुरुष बन गया। ऐसे में पहले उसने खुद को पुरुष के रूप में वर्णित करने की मांग की, लेकिन कुछ साय बाद उसे पछतावा हुआ तो उसने अदालत से अपील की कि उसे लैंगिक तौर पर तटस्थ घोषित किया जाए। पैनल में शामिल जजों ने भी इस मामले को नाटकीय बताया, लेकिन ये भी माना कि याचिकाकर्ता को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाकी जज भी इस बात से सहमत हुए। फिलहाल ब्राजील की उच्च न्यायालय ने इस मामले को सील कर दिया है। इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
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