New Pope: सिस्टिन चैपल की चिमनी से निकलता दिखा काला धुआं; पहले कॉन्क्लेव वोट में नहीं हुआ पोप का चुनाव
पोप के चुनाव की यह प्रक्रिया बेहद गुप्त रखी जाती है। इस बाबत, पोप के चुनाव में शामि होने वाले 70 देशों से आने वाले कार्डिनल्स को बाहरी दुनिया से अलग रखा जा रहा है, उनके सेलफोन को सरेंडर कर दिए गए हैं और वेटिकन के चारों ओर एयरवेव्स को जाम कर दिया गया है ताकि उन्हें सभी संचार से रोका जा सके।
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विस्तार
रोमन कैथोलिक चर्च के लिए नए पोप का चुनाव करने के लिए आयोजित सम्मेलन में सिस्टिन चैपल की चिमनी से बुधवार की शाम को काला धुआं निकलता दिखा, जो यह इस बात का सूचक था कि कार्डिनल्स की ओर से आयोजित किए गए पहले मतदान का फैसला नहीं हो सका है। बता दें कि हजारों श्रद्धालु सेंट पीटर्स स्क्वायर में जमा हुए। सभी अंत में चैपल की छत पर बने चिमनी से निकलने वाले धुएं की प्रतीक्षा कर रहे थे। धर्माध्यक्ष गुप्त मतदान में ईश्वरीय मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना कर रहे थे, लेकिन काला धुआं निकलने के बाद पता चल गया कि पोप का चयन नहीं हो पाया है। इस बीच, सीरिया में वेटिकन के राजदूत कार्डिनल मारियो जेनारी ने कहा कि अभी थोड़ा इंतज़ार करना होगा।
हालांकि आज के लिए किसी को यह उम्मीद भी नहीं थी कि चिमनी से सफेद धुंआ निकलेगा। बता दें कि अभी तक कभी ऐसा नहीं हुआ है कि कॉन्क्लेव के पहले ही दिन पोप के नाम पर सहमति बन जाए। हांलांकि कई कार्डिनल्स ने ये प्रक्रिया शुरु होने से पहले बयान दिया था कि वे गुरुवार या शुक्रवार तक पोप का चुनाव कर लेंगे।
अब जबकि पोप का चुनाव नहीं हो पाया है तो 133 कार्डिनल जिन्हें पोप के चुनाव में शामिल होना है, वे रोज सुबह के सत्र में दो बार और दोपहर में दो बार मतदान करेंगे। यह क्रम तब तक जारी रहेगा, जब तक कि पोप के लिए नामित व्यक्ति कम दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर लेता।
इससे पहले, नए पोप के चुनाव के लिए कैथोलिक चर्च के 133 कार्डिनल्स ने बुधवार को पारंपरिक रस्में शुरू कीं। 2,000 साल के इतिहास में भौगोलिक रूप से सबसे विविध सम्मेलन को शुरू करने से पहले सिस्टीन चैपल में सुबह के समय कार्डिनल्स दाखिल हुए। पोप के चुनाव की यह प्रक्रिया बेहद गुप्त रखी जाती है। इस बाबत, पोप के चुनाव में शामि होने वाले 70 देशों से आने वाले कार्डिनल्स को बाहरी दुनिया से अलग रखा जा रहा है, उनके सेलफोन को सरेंडर कर दिए गए हैं और वेटिकन के चारों ओर एयरवेव्स को जाम कर दिया गया है ताकि उन्हें सभी संचार से रोका जा सके। वरिष्ठ कार्डिनल जियोवानी बैटिस्टा रे ने कॉन्क्लेव में मतदान करने वाले कार्डिनल्स से आग्रह किया है कि वे ऐसे इन्सान को चुनें जो अपने निजी हितों के पूरी तरह दूर हो।
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इस तरह शुरू हुई पारंपरिक रस्म
चमकीले लाल वस्त्र पहने हुए, कार्डिनल्स बेसिलिका के केंद्रीय गलियारे से नीचे की ओर बढ़े। उन्होंने मुख्य वेदी के चारों अ अपनी सीटें लीं। 91 वर्षीय कार्डिनल जियोवानी बैटिस्टा रे ने अमेरिकी पोप की देखरेख में हुए सुधारवादी पोपत्व को याद करते हुए एक भावपूर्ण उपदेश भी दिया।
काला-सफेद धुआं देता है पोप चयन की सूचना
पोप के चुनाव में अगर किसी को 89 वोट नहीं मिले तो सभी मतपत्र जला दिए जाएंगे। इस दौरान मतपत्रों में एक खास रसायन मिलाने के चलते उनमें से काला धुआं निकलता है। यानी नए पोप को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है। सफेद धुआं तब निकलता है जब नया पोप चुन लिया जाता है।
तीन अश्वेतों के नाम पर हो रहा विचार
पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार के बाद कई कैथोलिक नेता इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या चर्च को इस बार अपना पहला अश्वेत पोप चुनना चाहिए। ऐसे में तीन अफ्रीकी कार्डिनलों के नाम पर गंभीर विचार हो रहा है। यदिअगला पोप उप-सहारा अफ्रीका से हुआ तो वह वेटिकन के इतिहास में पहला होगा। हालांकि, यह चयन प्रक्रिया लंबी है, लेकिन कैथोलिक अफ्रीकियों को उम्मीद है कि फ्रांसिस का उत्तराधिकारी उनके महाद्वीप से एक अश्वेत कार्डिनल हो सकता है।
इन छह नामों की चर्चा सबसे ज्यादा
पीट्रो पारोलिन
देश : इटली
मृदुभाषी इतालवी कार्डिनल पारोलिन (70) पोप फ्रांसिस के अधीन वेटिकन के राज्य सचिव थे। इससे वे पोप के मुख्य सलाहकार बन गए। वे राज्य सचिव रोमन क्यूरिया, चर्च के केंद्रीय प्रशासन का भी नेतृत्व करते हैं। उप पोप के तौर पर असरदार तरीके से काम करने की वजह से उन्हें इस पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा सकता है।
लुइस एंटोनियो गोकिम टैगले
देश : फिलीपीन
कार्डिनल टैगले (67) के पास दशकों का पादरी अनुभव है। वे वेटिकन के लिए राजनयिक या चर्च कानून के विशेषज्ञ के विपरीत लोगों के बीच एक सक्रिय चर्च नेता रहे हैं। फिलीपीन में चर्च का बहुत प्रभाव है। यहां लगभग 80 फीसदीआबादी कैथोलिक है। देश में वर्तमान में कार्डिनल्स कॉलेज के रिकॉर्ड पांच सदस्य हैं।
फ्रिडोलिन अम्बोंगो बेसुंगु
देश : कांगोली
यह बहुत संभव है कि अगला पोप अफ्रीका से हो। यहां कैथोलिक चर्च लाखों सदस्यों को जोड़ना जारी रखता है। कार्डिनल अम्बोंगो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से आने वाले एक प्रमुख उम्मीदवार हैं। वे सात साल तक किंशासा के आर्कबिशप रहे हैं, और उन्हें पोप फ्रांसिस ने कार्डिनल नियुक्त किया था।
पीटर कोडवो अप्पिया तुर्कसन
देश : घाना
यदि तुर्कसन पोप के लिए चुने जाते हैं तो उन्हें प्रभावशाली कार्डिनल तुर्कसन को 1,500 वर्षों में पहला अफ्रीकी पोप होने का गौरव मिलेगा। हालांकि, कार्डिनल अम्बोंगो की तरह उन्होंने दावा किया है कि वे यह पद नहीं चाहते हैं। उन्होंने 2013 में बीबीसी से कहा था,मुझे यकीन नहीं है कि कोई पोप बनने की इच्छा रखता है।
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पीटर एर्डो
देश : हंगेरियन
51साल की उम्र से कार्डिनल रहे पीटर एर्डो को यूरोप में चर्च में बहुत सम्मान दिया जाता है। उन्होंने 2006 से 2016 तक दो बार यूरोपीय बिशप सम्मेलनों की परिषद का नेतृत्व किया है। वे अफ्रीकी कार्डिनल्स के बीच अच्छी तरह से जाने जाते हैं और उन्होंने रूढ़िवादी चर्च के साथ कैथोलिक संबंधों पर काम किया है।
एंजेलो स्कोला
राष्ट्रीयता : इटली
केवल 80 साल से कम उम्र के कार्डिनल ही कॉन्क्लेव में मतदान कर सकते हैं, लेकिन एंजेलो स्कोला अभी भी चुने जा सकते हैं। 2013 में फ्रांसिस के पोप चुने जाने के वक्त मिलान के पूर्व आर्कबिशप स्कोला भी इस पद की दौड़ में प्रमुख रहे थे। अब कॉन्क्लेव से पहले उनका नाम फिर से सामने आया है, क्योंकि वे इस सप्ताह बुढ़ापे पर एक किताब प्रकाशित कर रहे हैं।
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