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छत्तीसगढ़ के शक्तिपीठ: शारदीय नवरात्रि पर धमतरी के चार प्रमुख देवी मंदिरों में सुबह से उमड़ा आस्था का सैलाब

Mon, 12 Oct 2026 08:30 AM IST
धमतरी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी Published by: धमतरी ब्यूरो Updated Mon, 12 Oct 2026 08:30 AM IST
A massive surge of devotion witnessed at Dhamtari's four Shakti temple, Shardiya Navratri.
शक्ति की आराधना और भक्ति के पावन पर्व शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होते ही धमतरी जिले के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बन गया है। मां विंध्यवासिनी मंदिर (बिलाई माता मंदिर), गंगरेल स्थित मां अंगारमोती मंदिर और कुरूद स्थित छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर में माता के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है। भक्तजन माता के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं।


धमतरी जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े ये चारों शक्तिस्थल आस्था, लोकपरंपरा और जनविश्वास के विशिष्ट केंद्र हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिरों में पूजा-अर्चना, ज्योति प्रज्वलन और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भक्तिमय वातावरण निर्मित होता है। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुगम दर्शन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।


मां विंध्यवासिनी मंदिर 
धमतरी शहर के हृदयस्थल में स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर को बिलाई माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर जिले के प्राचीन और प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शामिल है। जनश्रुति के अनुसार, यहां माता की प्रतिमा स्वयंभू रूप में प्रकट हुई थी। मंदिर के नाम से जुड़ी लोककथा में बिल्लियों का उल्लेख मिलता है, जिसके कारण माता को बिलाई माता कहा जाने लगा। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, वर्ष 1825 में चंद्रभागा पंवार द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था।


मां विंध्यवासिनी को नगर की आराध्य देवी के रूप में विशेष श्रद्धा प्राप्त है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मंदिर में ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं। इन दिनों मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त माता से परिवार की मंगलकामना, सुख-शांति और जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। मंदिर परिसर की ऐतिहासिक बावली भी इसकी प्राचीन धार्मिक परंपरा और विरासत से जुड़ी विशेष पहचान है।


मां अंगारमोती मंदिर, गंगरेल : 52 गांवों की आस्था का केंद्र
गंगरेल बांध के समीप प्राकृतिक परिवेश में स्थित मां अंगारमोती मंदिर धमतरी जिले के प्रसिद्ध शक्तिस्थलों में से एक है। स्थानीय जनश्रुतियों में माता को ऋषि अंगिरा की पुत्री तथा 52 गांवों की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। क्षेत्र के ग्रामीणों की माता के प्रति गहरी आस्था है। विवाह, नए कार्यों की शुरुआत और अन्य शुभ अवसरों पर भी श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचकर आशीर्वाद लेते हैं।मंदिर का इतिहास गंगरेल बांध के निर्माण और डूबान क्षेत्र में आए गांवों की स्मृतियों से भी जुड़ा है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, बांध निर्माण के बाद पुराने मंदिर क्षेत्र के प्रभावित होने पर माता की स्थापना वर्तमान स्थल पर की गई। इस तरह मंदिर विस्थापित गांवों की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक बन गया।


मां अंगारमोती मंदिर में चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना एवं मनोकामना ज्योति प्रज्वलित करने की परंपरा है। दीपावली के बाद आयोजित होने वाली प्रसिद्ध देव मड़ई में भी 52 गांवों के देवी-देवताओं की सहभागिता की परंपरा निभाई जाती है। नवरात्रि के दौरान यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु माता से सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं।


छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर, कुरूद 
कुरूद स्थित छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर प्रदेश की अस्मिता, मातृभूमि के प्रति सम्मान और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के गौरव का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ महतारी को प्रदेश की धरती, लोकजीवन, कृषि परंपरा, प्रकृति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीकात्मक स्वरूप में सम्मान दिया जाता है। इस मंदिर में श्रद्धालु देवी के प्रति आस्था व्यक्त करने के साथ अपनी जन्मभूमि और प्रदेश की उन्नति, खुशहाली तथा समृद्धि की कामना करते हैं।छत्तीसगढ़ महतारी की अवधारणा प्रदेश के लोगों को अपनी भाषा, लोकसंस्कृति, परंपराओं और माटी से जोड़ती है। नवरात्रि के अवसर पर यहां पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं के लिए यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक गौरव की अनुभूति का केंद्र भी है।


शीतला माता मंदिर
धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र में स्थित मां शीतला माता मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। शारदीय नवरात्रि के अवसर पर यहां भक्तजन माता के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालु मां शीतला से परिवार की सुख-शांति, आरोग्य, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। लोकपरंपरा में मां शीतला को आरोग्य एवं जनकल्याण की देवी के रूप में पूजा जाता है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तिमय वातावरण रहता है और क्षेत्र के लोग पारंपरिक श्रद्धा के साथ माता की आराधना करते हैं।नगरी क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में इस मंदिर का विशेष स्थान है। नवरात्रि जैसे पर्व स्थानीय समुदाय को आस्था, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं।


 प्रशासन सजग
शारदीय नवरात्रि के दौरान तीनों प्रमुख शक्तिस्थलों में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। दर्शनार्थियों की सुविधा, भीड़ का सुव्यवस्थित प्रबंधन, आवागमन और सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण एवं सुविधाजनक ढंग से माता के दर्शन कर सकें।नवरात्रि का यह पर्व धमतरी जिले की धार्मिक आस्था, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को एक सूत्र में पिरोता है। मां विंध्यवासिनी की प्राचीन आराधना परंपरा, मां अंगारमोती से जुड़ी 52 गांवों की सामूहिक आस्था और छत्तीसगढ़ महतारी के प्रति सम्मान—तीनों मिलकर जिले की विशिष्ट आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाते हैं।
 
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