उत्तराखंडः सेंधमारी से डरी कांग्रेस ने विधायक हिमाचल भेजे
उत्तराखंड में कांग्रेस के लिए राजनीतिक परिस्थितियां जटिल होती जा रही हैं। सरकार गठन की संभावना न्यायालय की चौखट पर लंबित है और कांग्रेस को विधायकों को धरोहर की तरह सहेजना पड़ रहा है।
सेंधमारी की आशंका के चलते शुक्रवार को कांग्रेस ने अपने विधायकों को हिमाचल भेज दिया। इनको अलग-अलग दलों में शाम के समय रवाना किया गया। विधायकों को सिरमौर और सोलन जनपदों में अलग-अलग गुप्त स्थानों पर भेजा गया है।
बाकी विधायक शनिवार सुबह रवाना होंगे। सूत्रों का कहना है कि विधायकों की सुरक्षा के लिहाज से पार्टी ने कांग्रेस शासित प्रदेश का चयन किया है। नौ विधायकों की बगावत से सरकार गंवाने के बाद कांग्रेस अपने बाकी विधायकों और सहयोगी पीडीएफ के विधायकों को लेकर चिंता में है।
सरकार गठन में हो रही देरी से बड़ा सेंधमारी का खतरा
अलग अलग समूह में गए इन विधायकों को सिरमौर व सोलन जिलों में गुप्त स्थानों पर रखा गया है।
शुक्रवार को हिमाचल रवाना होने वाले विधायकों में विक्रम नेगी, विजयपाल सजवाण, सरिता आर्य, रेखा आर्य, मनोज तिवारी, ललित फर्स्वाण, हेमेश खर्कवाल, राजेंद्र भंडारी, प्रो. जीतराम, अनुसूईया प्रसाद मैखुरी के अलावा पीडीएफ के दिनैश धनै व मंत्रीप्रसाद नैथानी शामिल हैं।
सूत्रों की मानें तो शेष विधायक शनिवार की सुबह ही हिमाचल रवाना हो जाएंगे।
विधायकों की सेंधमारी रोकने के लिए क्या-क्या किया
विगत 18 मार्च को सदन के भीतर जो कुछ हुआ, अभी तक भी उसका हैंगओवर बना हुआ है। कांग्रेस के नौ विधायकों ने वित्त विनियोग विधेयक पर वोटिंग के दौरान विद्रोह किया तो सरकार पर संकट आ गया।
समूचे विपक्ष और विजय बहुगुणा व हरक सिंह रावत समेत कांग्रेस के नौ सदस्यों की शिकायत पर राज्यपाल ने 19 मार्च को ही हरीश सरकार को 28 मार्च तक बहुमत साबित करने को कहा था। इस अवधि में सुरक्षित रखने के लिहाज से भाजपा ने अपने व कांग्रेस के नौ असंतुष्टों को गुड़गांव व जयपुर, पुष्कर समेत कई शहरों का भ्रमण कराया।
वहीं, फिक्रमंद कांग्रेस ने अपने व पीडीएफ के विधायकों को रामनगर रिसोर्ट में रखा। दोनों तरफ से यही तैयारी थी कि 28 मार्च को बहुमत साबित करने वाले दिन वे एकसाथ आएंगे। लेकिन एक दिन पहले ही राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।