{"_id":"5e496b4a8ebc3ee5eb14ce02","slug":"workshop-of-modern-utopean-society-khatima-news-hld3738554177","type":"story","status":"publish","title_hn":"लेखनी में दम इतना हो कि प्रकाशक खुद लेखक के पास आए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लेखनी में दम इतना हो कि प्रकाशक खुद लेखक के पास आए
विज्ञापन
खटीमा में आयोजित तृतीय सीमांत साहित्य उत्सव में मौजूद साहित्यकार व लोग।
- फोटो : KHATIMA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खटीमा। मॉडर्न यूटोपियन सोसाइटी की ओर से मंत्रा क्लब में तृतीय सीमांत साहित्य उत्सव आयोजित किया गया। स्थानीय और नेपाल के साहित्यकारों ने तीन सत्रों में हिस्सा लिया। कलाकारों ने राग-फाग में कुमाऊंनी होली, भंगड़ा, थारू होली से मन मोहा।
पहले सत्र में किशोरावस्था, गैर परंपरागत शिक्षा और सामाजिक समझ विषय पर चर्चा हुई। इसमें लखनऊ के वरिष्ठ साहित्यकार प्रतूल जोशी, सरिता पंथी, मोहन बिष्ट, जयशंकर चौबे, डॉ. अनीता रस्तोगी ने कहा कि परंपरागत शिक्षा की कमी को गैर पारंपरिक शिक्षा पूर्ण करने में सक्षम है। युवाओं में नशे का प्रकोप, आत्महत्या, अपराध की प्रवृत्ति, परिवार, समाज से कटाव पर भी चर्चा हुई। दूसरे सत्र में डिजिटल साहित्य, सोच, भाषा, लेखन पर विचारोत्तेजक विमर्श हुआ।
मुख्य वक्ता अशोक पांडेय ने नई पीढ़ी को कुछ लिखने से पहले पढ़ने की नसीहत दी। अर्पणा सिंह, विलास सिंह, डॉ. राजविंदर कौर ने भी विचार रखे। अंतिम सत्र में साहित्य, बाजार, नैतिकता विषय पर डॉ. सिद्धेश्वर सिंह, पत्रकार महेश पांडेय, भुवन जोशी, सुभाष वर्मा सुखन ने कहा कि लेखक की लेखनी में इतना दम हो कि प्रकाशक खुद लेखक के पास आए। बाजार का पीछा न करना पड़े। कुछ प्रकाशकों की ज्यादतियों के प्रति भी ध्यान आकर्षित कराया। पक्षियों पर परिचर्चा, छायाचित्र प्रदर्शनी ने भी वाहवाही लूटी।
विज्ञापन
नोजगे स्कूल के बच्चों ने भंगड़ा नृत्य, नानकमत्ता पब्लिक स्कूल के बच्चों ने थारू, कुमाऊंनी होली से मन मोहा। डॉ. प्रशांत जोशी ने संचालन किया। इस मौके पर रुद्रपुर के डॉ. दीपक रस्तोगी, डॉ. चंद्रशेखर जोशी, पूरन बिष्ट, पंकज भट्ट, अंजू भट्ट, जीडी जोशी, कमलेश अटवाल, रवि पांडे, कैलाश पांडे, शरद सक्सेना, बीसी जोशी, निर्मल नियोलिया, डॉ. लता जोशी, केदार रौतेला, डॉ. सिराज अहमद, नरेंद्र रौतेला, डॉ. धीरज चंदोला, नक्षत्र पांडेय आदि रहे।
विज्ञापन
पहले सत्र में किशोरावस्था, गैर परंपरागत शिक्षा और सामाजिक समझ विषय पर चर्चा हुई। इसमें लखनऊ के वरिष्ठ साहित्यकार प्रतूल जोशी, सरिता पंथी, मोहन बिष्ट, जयशंकर चौबे, डॉ. अनीता रस्तोगी ने कहा कि परंपरागत शिक्षा की कमी को गैर पारंपरिक शिक्षा पूर्ण करने में सक्षम है। युवाओं में नशे का प्रकोप, आत्महत्या, अपराध की प्रवृत्ति, परिवार, समाज से कटाव पर भी चर्चा हुई। दूसरे सत्र में डिजिटल साहित्य, सोच, भाषा, लेखन पर विचारोत्तेजक विमर्श हुआ।
विज्ञापन
मुख्य वक्ता अशोक पांडेय ने नई पीढ़ी को कुछ लिखने से पहले पढ़ने की नसीहत दी। अर्पणा सिंह, विलास सिंह, डॉ. राजविंदर कौर ने भी विचार रखे। अंतिम सत्र में साहित्य, बाजार, नैतिकता विषय पर डॉ. सिद्धेश्वर सिंह, पत्रकार महेश पांडेय, भुवन जोशी, सुभाष वर्मा सुखन ने कहा कि लेखक की लेखनी में इतना दम हो कि प्रकाशक खुद लेखक के पास आए। बाजार का पीछा न करना पड़े। कुछ प्रकाशकों की ज्यादतियों के प्रति भी ध्यान आकर्षित कराया। पक्षियों पर परिचर्चा, छायाचित्र प्रदर्शनी ने भी वाहवाही लूटी।
विज्ञापन
नोजगे स्कूल के बच्चों ने भंगड़ा नृत्य, नानकमत्ता पब्लिक स्कूल के बच्चों ने थारू, कुमाऊंनी होली से मन मोहा। डॉ. प्रशांत जोशी ने संचालन किया। इस मौके पर रुद्रपुर के डॉ. दीपक रस्तोगी, डॉ. चंद्रशेखर जोशी, पूरन बिष्ट, पंकज भट्ट, अंजू भट्ट, जीडी जोशी, कमलेश अटवाल, रवि पांडे, कैलाश पांडे, शरद सक्सेना, बीसी जोशी, निर्मल नियोलिया, डॉ. लता जोशी, केदार रौतेला, डॉ. सिराज अहमद, नरेंद्र रौतेला, डॉ. धीरज चंदोला, नक्षत्र पांडेय आदि रहे।