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Uttarakhand Encounter: उत्तराखंड में हुआ था दिल दहला देने वाला एनकाउंटर, बदमाशों में खौफ; जानें ताजा मामला

Wed, 10 Apr 2024 08:47 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 10 Apr 2024 08:47 AM IST
सार

उत्तराखंड में राज्य बनने के एक दशक तक एनकाउंटरों से कई बदमाशों का सफाया हुआ था। इनमें कई एनकाउंटर चर्चित हुए और एनकाउंटर के डर से कई बदमाश सरेंडर कर गए। खबर में पढ़िए चर्चित एनकाउंटर के बारे में...

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There used to be fear among miscreants due to encounter in Terai Bhabar in uttarakhand
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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तराई भाबर में अविभाजित यूपी और राज्य बनने के एक दशक तक एनकाउंटरों से कई बदमाशों का सफाया हुआ था। इनमें कई एनकाउंटर चर्चित हुए और एनकाउंटर के डर से कई बदमाश सरेंडर कर गए। रणवीर एनकाउंटर से पुलिस की छवि पर दाग लगा तो एनकाउंटर शब्द पुलिस के जेहन से ही गायब हो गया। अब 14 साल नौ महीने बाद बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड में हत्यारोपी अमरजीत के एनकाउंटर की गूंज सुनाई दी है।

जानकारी के अनुसार 90 के दशक में तराई आतंकवाद की दहशत में था। आतंकवादियोें ने कई लाेगों के साथ ही सीओ सहित तमाम पुलिस कर्मियों को निशाना बनाया था। 1991 में खटीमा के मझौला बिरिया में पुलिस ने परमजीत सिंह पम्मा और यदुवेंदर सिंह यादु का खटीमा के मझौला बिरिया में एनकाउंटर किया था। बेहद खुंखार आतंकी यादु पर पंजाब सरकार ने 20 लाख से अधिक का इनाम रखा था और उस पर सैकड़ों लोगाें की हत्या का आरोप था।

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1991 में जसपुर में आतंकी बलविंदर सिंह बिंदा और 1993 में पंतनगर क्षेत्र में आतंकी हीरा सिंह का एनकाउंटर हुआ था। आतंकवाद के सफाए के कुछ साल बाद अपराधों का ग्राफ बढ़ गया। यूपी से अलग होने के बाद नैनीताल और ऊधमसिंहनगर में बड़े अपराधी और माफिया डाॅन तक सक्रिय हो गए थे। दोनों जिलों में 2005 से 2009 तक कई बदमाशों के एनकाउंटर हुए लेकिन रणवीर एनकाउंटर में पुलिसकर्मियों के जेल जाने के बाद एनकाउंटर पर रोक लग गई थी।
 

रिटायर्ड सीओ जेसी पाठक बताते हैं कि पहले लूट, डकैती और हत्याओं के केस बहुत ज्यादा होते थे और सजा कम केसों में हो पाती थी। बदमाशों को एनकाउंटर का खौफ रहता था। लेकिन न्यायालयों के कठोर रुख से बदमाशों को कड़ी सजाएं हो रही हैं।

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केस नंबर एक-
वर्ष 2005 में नैनीताल में जेल ब्रेक कर दो बदमाश भाग निकले थे। तत्कालीन एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम बदमाशों को खोलने में जुटी थी। पुलिस ने दोनों बदमाशों का मुक्तेश्वर में एनकाउंटर किया था।

केस नंबर दो-
वर्ष 2006 में बैंक लूट और भीमताल के प्रापर्टी डीलर से रंगदारी मांगने सहित तमाम संगीन आरोपों में शामिल हल्द्वानी के एक बदमाश के पीछे पुलिस लगी थी। खैरना रानीखेत मार्ग पर एनकाउंटर हुआ था और बदमाश मारा गया था।

केस नंबर तीन-
हल्द्वानी के एक पेट्रोल पंप पर वर्ष 2008 में डकैती हुई थी। डकैती में शामिल तीन बदमाश रुद्रपुर में छिपे थे। हल्द्वानी के तत्कालीन और बेहद ईमानदार छवि के इंस्पेक्टर ने टीम के साथ तीनों बदमाशों का एनकाउंटर किया था।

केस नंबर चार-
जनवरी 2009 में झनकईयां थाना क्षेत्र में हत्या के एक आरोपी ने एक युवती को गन प्वाइंट पर ले लिया था। इस पर पुलिस ने उसे घेर लिया था। पुलिस ने सनकी का भीड़ के सामने ही एनकाउंटर कर दिया था। यह एनकाउंटर काफी चर्चित रहा था।

केस नंबर पांच-
वर्ष 2005 में गूलरभोज के बौर जलाशय के पास डकैती के साथ दुष्कर्म करने वाले एक डकैत की पुलिस ने घेराबंदी की थी। पुलिस टीम पर डकैत ने फायर किए थे। इसके बाद पुलिस ने एनकाउंटर में डकैत को मार गिराया था। 

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