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किसानों के सामने आय दोगुनी करने के उदाहरण पेश करें वैज्ञानिक
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
Updated Wed, 28 Feb 2018 12:34 AM IST
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पंतनगर विवि के अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक लेते केंद्रीय कृषि मंत्री और सीएम।
- फोटो : Amar Ujala
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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर को आर्थिक रूप से लाभकारी संस्था बनाने और इसे किसानों के समक्ष एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विवि के पास हजारों एकड़ जमीन है, जिससे आय कई गुना बढ़ाई जा सकती है।
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जरूरत है कि किसानों के सामने छोटी जोतों से आय को दोगुना करने के उदाहरण पेश किए जाएं, तभी वे कृषि की ओर से आकर्षित हो पाएंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय में समन्वित खेती के भिन्न-भिन्न मॉडल विकसित कर उनके खर्च और आमदनी को दर्शाते हुए किसानों के बीच प्रदर्शित करने पर बल दिया।
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मंगलवार को प्रशासनिक भवन स्थित कुलपति सभागार में केंद्रीय कृषि मंत्री, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत और कृषि मंत्री (उत्तराखंड) सुबोध उनियाल ने विवि के अधिष्ठाता, निदेशक, वैज्ञानिक और अधिकारियों की बैठक ली। केंद्रीय कृषि मंत्री ने चार वैज्ञानिकों के समूह की ओर से चार गांवों को गोद लेने का सुझाव दिया, ताकि प्रदेश की न्याय पंचायतों के अधिकतर गांवों को गोद लिया जा सके। उन्होंने वर्ष 2018 को मोटे अनाजों के वर्ष के रूप में मनाए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि विवि को इस दिशा में कार्य करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि कृषि में बदलाव कृषि विश्वविद्यालयों, संस्थानों और कृषि से संबंधित सभी अधिकारियों की मेहनत से ही लाया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय संतुलित उर्वरक और समन्वित खेती के तरीकों से दूसरी हरित क्रांति के जनक के रूप में उभरेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता पहाड़ों के तेजी से खेती विहीन होने की है। वैज्ञानिकों को इन कारणों के समाधान के लिए अधिक से अधिक शोध करना होगा।
इसके साथ ही खेती को लाभप्रद बनाने की तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की जरूरत है। सीएम ने केंद्रीय कृषि मंत्री को उत्तराखंड की 670 न्याय पंचायतों में वृद्धि केंद्र (ग्रोथ सेंटर) विकसित किए जाने की योजना के बारे में भी बताया।