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बारूद के ढेर पर पतरामपुर, कभी भी हो सकता है हादसा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊधमसिंह नगर
Updated Fri, 16 Feb 2018 12:12 AM IST
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अग्नि-1 मिसाइल
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काशीपुर स्थित कुंडा थाना क्षेत्र के पतरामपुर में पिछले 13 साल से दबी 555 कार्यक्षम मिसाइलों को निष्क्रिय करने की कवायद पुलिस प्रशासन लंबा समय बीतने के बाद भी शुरू नहीं कर पाया है। छह माह पूर्व पुलिस मुख्यालय से 20 लाख का बजट स्वीकृत होने के बाद लखनऊ से पहुंची सेना की टीम ने पतरामपुर का स्थलीय निरीक्षण भी किया था, लेकिन उसके बाद की प्रक्रिया को पुलिस प्रशासन अंजाम नहीं दे सका।
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वर्ष 2004 में 10 दिसंबर को आईसीडी तुगलकाबाद से 16 कंटेनर में स्क्रैप काशीपुर की एसजी स्टील फैक्ट्री में लाया गया था। स्क्रैप की इस खेप में 556 कार्यक्षम मिसाइलें भी शामिल थीं। 30 दिसंबर को एक मिसाइल को काटने के दौरान मिसाइल फटने से फैक्ट्री के वेल्डर टांडा उज्जैन निवासी सतपाल की मौके पर ही मौत हो गई।
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जांच के बाद पता चला कि 555 अन्य मिसाइलें भी कार्यक्षम हैं। मिसाइलों के फटने से आसपास के बड़े इलाके में भारी नुकसान हो सकता था, जिसे देखते हुए मिसाइल विशेषज्ञों ने सेना की मदद से कार्यक्षम मिसाइलों को पतरामपुर की जमीन में दफना दिया। छह माह पूर्व मिसाइलों को नष्ट करने के लिए पुलिस मुख्यालय से 20 लाख रुपये का बजट जारी हुआ। पुलिस विभाग ने इस काम के लिए कुछ आवश्यक उपकरण भी जुटा लिए।
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इसके बाद 26 जुलाई 2017 को बाराबंकी लखनऊ से सेना की बम डिस्पोजल टीम के प्रमुख सूबेदार प्यारा सिंह एवं लांसनायक राजपाल ने पतरामपुर चौकी में पहुंचकर जिस स्थान पर मिसाइल दबी थी, उसकी गहराई नापी। इसके बाद फीका नदी के किनारे और पतरामपुर का निरीक्षण भी किया। प्यारा सिंह का कहना था कि मिसाइलें पुरानी होने पर अधिक संवेदनशील हो जाती हैं, इसलिए मिसाइलों को जल्द निष्क्रिय करना जरूरी है। लेकिन, निरीक्षण के बाद पुलिस प्रशासन की कवायद को भी विराम लग गया और छह माह बाद भी पुलिस मिसाइलों को नष्ट करने के लिए कदम नहीं उठा सकी।
पुलिस अधिकारियों की मानें तो मिसाइलों को नष्ट करने के लिए उपकरण टुकड़ों में मिले थे, इसलिए समय अधिक लग गया। अभी भी मुख्यालय से कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं, जिससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि प्रक्रिया को अंजाम देने में करीब चार से छह माह लग सकते हैं।
पतरामपुर में दबी मिसाइलों को नष्ट करने के लिए बजट जारी हो चुका था, लेकिन उपकरण टुकड़ों में उपलब्ध होने के कारण कार्रवाई नहीं हो पाई। कुछ और उपकरण अभी मिलने बाकी हैं। उपकरण मिलने के बाद एनएसजी और सेना की मदद से चार से छह माह के भीतर मिसाइलों को नष्ट कर दिया जाएगा। - अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, कानून-व्यवस्था।