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नगर निगम में मेयर पर करोड़ों के घपले का आरोप
अमर उजाला ब्यूूरो रुद्रपुर।
Updated Sat, 11 Nov 2017 12:11 AM IST
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रुद्रपुर में प्रेस वार्ता करते कांग्रेसी पार्षद
- फोटो : amar ujala
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कांग्रेस के पार्षदों ने कूड़ा कलेक्शन, एलईडी और यूनिपोल के टेंडर में करोड़ों रुपये के घपले का आरोप लगाते हुए मेयर की घेराबंदी शुरू कर दी है। उन्होंने आरटीआई से मिले दस्तावेज के आधार पर मेयर और तत्कालीन एमएनए पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सरकार से घपलों की जांच एसआईटी से कराने की मांग की है।
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शुक्रवार को एक होटल में पत्रकार वार्ता में पार्षद ललित मिगलानी, गौरव खुराना, सुमित छाबड़ा, नदीम खान, सौरभ शर्मा, कालीचरन, विकास मल्लिक और मोनू निषाद ने कहा आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, बीते अगस्त में घर-घर जाकर कूड़ा उठाने के लिए ठेकेदार को प्रतिमाह 18 लाख 10 हजार रुपये और प्रतिवर्ष दो करोड़ 16 लाख रुपये का ठेका दिया गया है। भारी भरकम धनराशि खर्चने के बाद भी कूड़े की गाड़ियां निगम की ओर से ठेकेदार को दी जा रही हैं।
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पहले ऑनलाइन निविदा में बड़ी कंपनियों के शामिल होने पर टेंडर ही निरस्त कर दिए गए थे। आरोप लगाया कि गोपनीय तरीके से जानबूझकर टेंडर की निविदा बेहद कम प्रसार वाले समाचार पत्र में दी गई थी। जिस फर्म को करोड़ों का ठेका दिया गया, उसकी 2016-17 में वार्षिक आय ढाई लाख से भी कम है। उन्होंने कहा कि अगर निगम पारदर्शी ढंग से टेंडर प्रक्रिया करवाता तो आर्थिक बोझ कम पड़ता और जनता से भी उपभोक्ता शुल्क कम वसूला जाता।
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आरोप लगाया कि इसी तरह करोड़ों रुपये के एलईडी खरीद में घपला किया गया है। बीते जुलाई में तीन फर्मों देव इंटरप्राइजेज, संत और भारत इंटरप्राइजेज ने एलईडी खरीद में टेंडर डाला था। इनमें देव इंटरप्राइजेज के नाम टेंडर खुला था। देव इंटरप्राइजेज की मालिक कमलजीत और संत इंटरप्राइजेज के मालिक उनके पिता समरपाल सिंह है। बताया कि तीसरी फर्म भारत इंटरप्राइजेज के पास एलईडी सप्लाई का अनुभव भी नहीं था, लेकिन उसको मानकों को दरकिनार कर टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया गया।
उनका आरोप है कि बीते साल यूनिपोल और विज्ञापन के टेंडर में गड़बड़ी की गई थी। जिस फर्म को ठेका दिया गया, उसका टेंडर से संबंधित अनिवार्य पत्र संलग्न नहीं था। फर्म स्वामी के निविदा में दस्तखत नहीं थे। इसके अलावा कुछ साल पहले डाली गई टाइलों को उखाड़ा और नई टाइल रोड बनाकर लाखों के वारे न्यारे किए गए।
आरोप लगाया कि मेयर सोनी कोली के अलावा तत्कालीन एमएनए दीप्ति वैश्य भी पूरे खेल में शामिल थीं। जब तक वे एनएनए रहीं तब तक सूचना संबंधी जानकारियां निगम से नहीं मिलीं।
कांग्रेस प्रदेश महामंत्री हिमांशु गाबा और नगर अध्यक्ष जगदीश तनेजा ने कहा कि निगम को लूटखसोट का केंद्र बना दिया गया है। मामले की एसआईटी जांच को लेकर कांग्रेस मोर्चा खोलेगी। इस मौके पर सुशील गाबा, पार्षद विकास मल्लिक, मोनू निषाद, गौरव खुराना, सुमित छाबड़ा सहित अनेक मौजूद रहे। तत्कालीन एमएनए से संपर्क नहीं हो सका।
निकाय चुनाव के मद्देनजर कांग्रेसी गलत आरोप लगा रहे हैं। अन्य निगमों की तुलना में सबसे कम डोर टू डोर कलेक्शन में खर्च हो रहा है। कूड़ा कलेक्शन से जनता खुश है। केवल मेयर टेंडर नहीं करती बल्कि पूरी कमेटी शामिल होती हैं। जो भी एलईडी खरीद हुई है, उसकी गुणवत्ता जांची जा सकती है। सभी टेंडर मानकों के अनुरुप पारदर्शी ढंग से किए गए हैं। वे हर प्रकार की जांच को तैयार हैं। कांग्रेसियों के पास कोर्ट का विकल्प भी खुला है। वहां भी वे आरोपों का सामना करने को तैयार हैं।
- मेयर सोनी कोली से संपर्क करने पर उनके पति सुरेश कोली ने बताया