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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   evidence are not there against Data intery operater

डाटा एंट्री ऑपरेटरों के खिलाफ आपराधिक कृत्य के साक्ष्य नहीं

Sat, 11 Aug 2018 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो  रुद्रपुर।
अमर उजाला ब्यूरो  रुद्रपुर। Updated Sat, 11 Aug 2018 12:24 AM IST
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राष्ट्रीय राजमार्ग में भूमि मुआवजा घोटाले में एसआईटी की जांच जैसे-जैसे अंतिम चरण में जा रही है, वैसे-वैसे कई लोगों की मुश्किलें बढ़ने के साथ ही कुछ को राहत भी मिलती दिख रही है। घोटाला उजागर होने के समय प्रारंभिक जांच के आधार पर नौकरी से हटाए गए चार डाटा एंट्री ऑपरेटरों के खिलाफ आपराधिक कृत्य के साक्ष्य नहीं मिल सके हैं।

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ऑपरेटरों ने आला अधिकारियों के आदेश पर ही रजिस्ट्रार कानूनगो की ओर से तैयार जमीनों की नामांतरण बही को कंप्यूटर में चढ़ाने का काम करने का बयान दिया था। इनमें से एक ऑपरेटर को एसआईटी ने सरकारी गवाह भी बना दिया था। माना जा रहा है कि घोटाले में आपराधिक कृत्य का दोषी न मिलने पर इन लोगों पर लगे दाग मिटेंगे।  
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मार्च 2017 में एनएच भूमि घोटाला उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल छह पीसीएस अफसरों को निलंबित कर दिया था। इसके अलावा जिले में घोटाले में लिप्तता के आरोप में रजिस्ट्रार कानूनगो, पेशकार सहित नौ कर्मचारियों को निलंबित करने के साथ ही संविदा में तैनात चार डाटा एंट्री ऑपरेटरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई थी। डाटा एंट्री ऑपरेटरों में सितारगंज के अरुण दुबे, काशीपुर के मनोज कुमार, अनुज कुमार और गदरपुर की अनुपमा रावत शामिल थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मनोज बहाल हो गया था। इधर, एसआईटी ने भी सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों, किसानों के साथ ही डाटा एंट्री ऑपरेटरों को भी जांच के दायरे में लिया था।
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किसानों और अफसरों के बीच में बिचौलिये की भूमिका निभाने वाले काशीपुर के डाटा एंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार को एसआईटी ने जेल भेज दिया था। लेकिन, चार डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने बयान में घोटाले में लिप्तता से इनकार किया था और नामांतरण नकल सहित सभी कार्यवाही आला अधिकारियों के लिखित आदेश पर करने की बात कही थी। सरकारी गवाह बने मनोज ने तो तत्कालीन नायब तहसीलदार के लिखित आदेश पर ही कार्य करने की बात कही थी। सूत्रों के अनुसार चारों की भूमिका की गहनता से जांच के बाद इनके खिलाफ आपराधिक कृत्य के साक्ष्य नहीं मिल सके हैं।  इसके आधार पर माना जा रहा है कि डेढ़ साल से घोटाले में शामिल होने के आरोप झेल रहे डाटा एंट्री ऑपरेटरों को राहत मिल सकेगी। 


तो राजस्व निरीक्षक कुंवर सिंह भी बचेंगे 
रुद्रपुर। भूमि मुआवजा घोटाले की शुरुआत में निलंबित किए गए राजस्व निरीक्षक कुंवर सिंह के खिलाफ भी आपराधिक साक्ष्य नहीं मिल पाए हैं। बाजपुर में रहते निलंबित हुए कुंवर को कुछ महीने बाद बहाल कर दिया था। वर्तमान में कुंवर गदरपुर तहसील में तैनात हैं। कुंवर सिंह पर जमीनों की बैक डेट में हुई 143 की रिपोर्ट देने का आरोप लगा था। लेकिन, एसआईटी की जांच में पाया गया था कि कुंवर सिंह के कार्यकाल में जमीनों की बैक डेट का मामला जरूर पकड़ा गया था, लेकिन इसमें इनकी लिप्तता नहीं थी। एसआईटी ने कुंवर के बयान भी दर्ज किए थे। लेकिन कुंवर के खिलाफ एसआईटी जांच में आपराधिक साक्ष्य नहीं मिल सका है।  

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