{"_id":"6054de0c8ebc3e8ca31ac3eb","slug":"introduced-with-the-effective-technique-of-radiation-awareness-and-radiation-measurement-new-tehri-news-drn374143754","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘विकिरण जागरूकता व विकिरण मापन’ की प्रभावी तकनीक से कराया रूबरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘विकिरण जागरूकता व विकिरण मापन’ की प्रभावी तकनीक से कराया रूबरू
विज्ञापन
विकिरण जागरूकता ( रेडिएशन अवेयरनेस) पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में दुनियाभर के वैज्ञानिकों में शोध प्रस्तुत किए। जापान, ताइवान, पोलैंड , आईआईटी खड़गपुर के प्रख्यात वैज्ञानिकों ने ‘विकिरण जागरूकता व विकिरण मापन’ की प्रभावी तकनीक के बारे में अपने विचार रखे।
शुक्रवार को गढ़वाल केंद्रीय विवि के एसआरटी परिसर बादशाहीथौल में एसआरटी परिसर और राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की संयुक्त पहल पर ‘विकिरण जागरूकता व विकिरण मापन’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सम्मेलन के दूसरे दिन जापान के नेशनल सेंटर फॉर रेडियोलॉजिकल साइंसेज, वैज्ञानिक डा. सरत कुमार शाहू ने अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना एशियन रेडिएशन नेटवर्क के तहत उड़ीसा प्रांत के उच्च विकिरण वाले क्षेत्रों में किया गया शोध साझा किया। आईआईटी खड़गपुर के प्रो. देवाशीष सेनगुप्ता ने भारत में विकिरण मापन की प्रभावी तकनीक के बारे में बताया। जापान में प्रो. केंजी संगिमूरि ने विकिरण के माध्यम से गंभीर बीमारियों के निदान के बारे में बताया। जबकि ताइवान के वैज्ञानिक ने रेडॉन गैस के उत्सर्जन को भूकंप के पूर्वानुमान से जोड़ा। ताइवान के वैज्ञानिक ने सॉलिड स्टेट न्यूक्लियर डिटेक्टर की भूकंपीय एवं ज्वालामुखीय गतिविधियों के मापन में इसकी भूमिका पर चर्चा की। वहीं परिसर के शिक्षक डा. मुकेश प्रसाद बिजल्वाण ने पेयजल में यूरेनियम की उपस्थिति से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी दी। इसके अलावा डा. संध्या नेगी ने वातावरण में उपस्थित विषैली गैसों के अध्ययन के लिए विकसित जिंक ऑक्साइड सेंसर के बारे में अपना शोध साझा किया। गोष्ठी में पोलैंड के वैज्ञानिक कोजेक, प्रो. एए बौड़ाई, तिबोर कोबेक, स्पेन के लुइस क्यूंडोस, पोलैंड के माजूर, प्रो. आरसी रमोला, प्रो. करुणाकारा, प्रो. एससी भट्ट, प्रो. रोहित मेहरा ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर प्राचार्य प्रो. रेनू नेगी, डा. कुलदीप रावत, डा. गुरुपत गुसाईं, डा. महेंद्र प्रताप सिंह राणा, हंसराज बिष्ट और अजय बहुगुणा आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
शुक्रवार को गढ़वाल केंद्रीय विवि के एसआरटी परिसर बादशाहीथौल में एसआरटी परिसर और राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की संयुक्त पहल पर ‘विकिरण जागरूकता व विकिरण मापन’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सम्मेलन के दूसरे दिन जापान के नेशनल सेंटर फॉर रेडियोलॉजिकल साइंसेज, वैज्ञानिक डा. सरत कुमार शाहू ने अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना एशियन रेडिएशन नेटवर्क के तहत उड़ीसा प्रांत के उच्च विकिरण वाले क्षेत्रों में किया गया शोध साझा किया। आईआईटी खड़गपुर के प्रो. देवाशीष सेनगुप्ता ने भारत में विकिरण मापन की प्रभावी तकनीक के बारे में बताया। जापान में प्रो. केंजी संगिमूरि ने विकिरण के माध्यम से गंभीर बीमारियों के निदान के बारे में बताया। जबकि ताइवान के वैज्ञानिक ने रेडॉन गैस के उत्सर्जन को भूकंप के पूर्वानुमान से जोड़ा। ताइवान के वैज्ञानिक ने सॉलिड स्टेट न्यूक्लियर डिटेक्टर की भूकंपीय एवं ज्वालामुखीय गतिविधियों के मापन में इसकी भूमिका पर चर्चा की। वहीं परिसर के शिक्षक डा. मुकेश प्रसाद बिजल्वाण ने पेयजल में यूरेनियम की उपस्थिति से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी दी। इसके अलावा डा. संध्या नेगी ने वातावरण में उपस्थित विषैली गैसों के अध्ययन के लिए विकसित जिंक ऑक्साइड सेंसर के बारे में अपना शोध साझा किया। गोष्ठी में पोलैंड के वैज्ञानिक कोजेक, प्रो. एए बौड़ाई, तिबोर कोबेक, स्पेन के लुइस क्यूंडोस, पोलैंड के माजूर, प्रो. आरसी रमोला, प्रो. करुणाकारा, प्रो. एससी भट्ट, प्रो. रोहित मेहरा ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर प्राचार्य प्रो. रेनू नेगी, डा. कुलदीप रावत, डा. गुरुपत गुसाईं, डा. महेंद्र प्रताप सिंह राणा, हंसराज बिष्ट और अजय बहुगुणा आदि मौजूद थे।
विज्ञापन